क्या राहुल गांधी को कम आंककर गलती कर रही है बीजेपी

Bjp and congress Political leader
Bjp and congress Political leader

2004 के लोकसभा चुनावों से पहले 4 दिसंबर 2003 का दिन बीजेपी ( Bjp ) के लिए काफी उत्साह भरा दिन था. पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में खुशनुमा माहौल था. पार्टी ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में शानदार जीत हासिल की थी. मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह, राजस्थान में साफ छवि वाले अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ( Congress ) के लिए प्रतिभावान अजीत जोगी को हराकर कांग्रेस की कमर तोड़ दी थी.

अरूण जेटली और प्रमोद महाजन का अतिउत्साह

ये हालात बीजेपी ( Bjp ) के लिए बेहद उत्साहित थे. बीजेपी को ऐसा लगता था कि वो 2004 के चुनावों में आसानी से जीत जाएगी. पार्टी सोनिया गांधी ( Sonia gandhi ) के हालात के मजे ले रही थी. उस वक्त सोनिया गांधी ( Sonia gandhi ) का अटलजी के सामने ठीक वैसे ही था. जैसे आज के वक्त में मोदी के सामने राहुल गांधी ( Rahul gandhi ) कद. इस पूरे खेल में दो नेता सबसे ज्यादा उत्साहित थे. प्रमोद महाजन और अरूण जेटली. प्रमोद महाजन राजस्थान के चुनाव प्रभारी थे जहां बीजेपी ( Bjp ) पहली बार अपने दम पर 120 सीटें जीतकर राज्य में सत्ता में आई थी. अरूण जेटली मध्यप्रदेश के प्रभारी थे, वहां भी बीजेपी को जीत मिली थी.

आज के वक्त में लोगों को ऐसा लगता है कि राहुल गांधी मोदी को चुनौति नहीं दे सकते. वे मोदी को हराने में सक्षम नहीं है. ठीक ऐसा ही 2003 के वक्त सोनिया गांधी ( Sonia gandhi ) के बारे में सोचते थे. पूरे देश को यही लगता था कि सोनिया गांधी अटलजी को टक्कर नहीं दे पाएगी. हकीकत तो ये है कि सोनिया गांधी ने 2004 में यूपीए सरकार भी बनाई और पर्दे के पीछे से पूरे 10 साल तक सत्ता चलाई.

2004 लोकसभा चुनाव परिणाम

2004 में बीजेपी के शाइनिंग इंडिया को जनता ने नकारा

प्रमोद महाजन ने प्रधानमंत्री वाजपेयी को चुनाव सिंतबर 2004 की बजाय अप्रैल में कराने का सुझाव दिया और पार्टी ने ”शाइनिंग इंडिया” का नारा दे दिया. इसके अलावा ‘बसपा’ का नारा भी दिया. बसपा यानि बिजली, सड़क और पानी. चुनाव प्रचार के केंद्र में वाजेपेयी थे लिहाजा पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता की कोशिश भी होनी थी. कुछ हासिल हो न हो माहौल बनाना था. इसके अलावा राम मंदिर मुद्दे को हवा देने के लिए उसके लिए भी कोशिश तेज करने का माहौल बनाया गया. उस समय भले ही बीजेपी ( Bjp ) तीन राज्यों में चुनाव जीती थी. लेकिन कई राज्यों के आंकड़े ऐसे थे जो पार्टी के लिए चिंताजनक थे.

आज करीब 16 साल बाद पार्टी ठीक वही गलती कर रही है. पीएम मोदी के मुकाबले में राहुल गांधी ( Rahul gandhi ) की तुलना की जा रही है. और पार्टी कार्यकर्ताओं को लगता है कि राहुल गांधी मोदी को चुनाव नहीं हरा सकते लेकिन उन्हैं 2004 के परिणाम को नहीं भूलना चाहिए. बीजेपी ( Bjp ) एक के बाद एक राज्यों में कमजोर हो रही है. आज की मोदी सरकार भी वाजपेयी सरकार की तरह राष्ट्रवाद और धार्मिक मुद्दों पर सिर्फ माहौल बनाने की कोशिश रही है. दो साल में बीजेपी देश के 70 प्रतिशत से घटकर अब सिर्फ 40 प्रतिशत आबादी पर राज्य सरकारें है.

2004 वाली गलतियां अब कर रही है बीजेपी

एक और उदाहरण से समझिए, आज के दौर में बीजेपी देश में हर गलत काम के लिए कांग्रेस ( Congress ) को जिम्मेदार ठहराती है, 2004 के दौर में भी पार्टी की मानसिकता यही थी. वो हर काम के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराती थी. 13 मई 2004 को लोकसभा चुनाव परिणाम आए थे और उससे ठीक एक दिन पहले बीजेपी मीडिया कक्ष में एसी ने काम करना बंद कर दिया. तो मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि इंडिया अब भी चमक रहा है, अगर उसमें कोई अड़चन है तो उसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है. ये एक छोटा सा उदाहरण है लेकिन उससे बीजेपी के मानसिकता को समझा जा सकता है.

ऐसे में फिर वही सवाल है कि क्या राहुल गांधी ( Rahul gandhi ) को छोटा आंककर बीजेपी और पीएम मोदी वही गलती कर रहे है. जो 2004 के दौर में वाजपेयी के नेतृत्व वाली बीजेपी ने की थी. क्या बीजेपी हर बात के लिए कांग्रेस ( Congress ) को जिम्मेदार ठहरकार वही गलती कर रही है. जो 2004 में की थी. क्या प्रदेश स्तर पर लगातार कमजोर होने के बावजूद अपने आप को विजयी दिखाने की कोशिश वही गलती है जो पार्टी ने 2004 में की थी

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