Rajasthan GK नोट्स: राजस्थान सामान्य ज्ञान 2020 पटवार भर्ती परीक्षा

राजस्थान सामान्य ज्ञान 2020
राजस्थान सामान्य ज्ञान 2020

राजस्थान सामान्य ज्ञान: क्षेत्रफल के नजरिये से भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान ( Rajasthan ) की पाकिस्तान से भी सीमा लगती है. पहले मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य था लेकिन साल 2000 में एमपी से छत्तीसगढ़ को अलग किया गया तो राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया.

राजस्थान का सामान्य परिचय

  • यहां ( Rajasthan ) का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है.
  • ये क्षेत्रफल देश के क्षेत्रफल का 10.41 प्रतिशत है.
  • राजस्थान जापान से थोड़ा ही छोटा है
  • राजस्थान इंग्लैंड से दो गुना, इजराइल से 17 गुना, चेकोस्लोवाकिया से 3 गुना और हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका से 5 गुना बड़ा है.
  • छठी शताब्दी से यहां राजपूतों का उदय हुआ जिसकी वजह से इसे राजपुताना भी कहते है
  • ऋषि वाल्मिकी ने भारत के इस पश्चिमी भूभाग को ‘मरूकांतर’ कहा था. शायद मरूस्थलीय भूभाग होने की वजह से ये नाम रखा था.
  • बात राजस्थान ( Rajasthan ) के प्राचीन नाम के सबूत करें तो वसंत गढ़ ( सिरोही ) में विक्रम संवत 682 का एक शिलालेख मिलता है जिसमें राजस्थानियादित्य शब्द का उल्लेख मिलता है.
  • मुहणोत नेणसी ने भी अपनी रचनाओं में राजस्थान शब्द का प्रयोग किया था
  • साल 1800 में अंग्रेज अधिकारी जॉर्ज थॉमस ने इसके लिए राजपुताना नाम दिया. विलियम फ्रेंकलिन की किताब मिलिट्री मेमोरी में इसका उल्लेख मिलता है.
  • इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने रायथान नाम दिया था. क्योंकि पुराने समय में यहां के लोग राजाओं के रहने की जगह को रायथान कहते थे.
  • जॉर्ज थॉमस ने रायथान शब्द का इस्तेमाल अपनी किताब ”एनाल्स एंड एक्टीविटीज ऑफ राजस्थान” में किया था. इस किताब का एक दूसरा नाम भी था. दूसरा नाम- ”सेंट्रल एंड वेस्टर्न स्टेट्स ऑफ इंडिया” यानि ”भारत के मध्य और पश्चिमी राज्य”
कर्नल जेम्स टॉड
जॉर्ज थॉमस और कर्नल जेम्स टॉड
  • कर्नल जेम्स टॉड की इस किताब का गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने हिंदी अनुवाद किया था
  • टॉड साल 1818 से लेकर 1821 तक मध्य मेवाड़ प्रांत के ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट रहे थे
  • जेम्स टॉड घोड़ों पर घूम घूम कर जानकारी जुटाते थे और इतिहास लिखते थे. इस वजह से कर्नल जेम्स टॉड को ”घोड़े वाले बाबा” भी कहते है
  • 26 जनवरी 1950 को ”राजस्थान” नाम रखा गया
  • राजस्थान के प्रथम राजप्रमुख जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह थे.
  • राजस्थान के प्रथम प्रधानमंत्री(मुख्यमंत्री) हीरालाल शास्त्री थे.
  • राजस्थान में पहले चुनाव 1952 में हुए थे. 1952 में टीकाराम पालीवाल प्रदेश के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने थे.
  • 1956 से पहले राजस्थान ( Rajasthan ) में राज्यपाल की जगह राजप्रमुख का पद होता था. लेकिन 1 नवंबर 1956 में राजप्रमुख का पद समाप्त कर राज्यपाल का पद बनाया गया. जिसके बाद गुरमुख निहाल सिंह राजस्थान के राज्यपाल बने. गुरमुख निहाल सिंह राजस्थान के पहले राज्यपाल थे.

राजस्थान में रिसायतों से जुड़े तथ्य ( राजस्थान सामान्य ज्ञान )

  • आजादी के समय राजस्थान में 19 रियासतें और तीन ठिकाने थे.
  • तीन ठिकाने- नीमराणा ( Alwar ), कुशलगढ़(बांसवाड़ा), लावा ( Ajmer )
  • देश में सियासत विभाग की स्थापना कब की गई- जुलाई 1947
  • सियासत विभाग का अध्यक्ष किसे बनाया गया था- सरदार वल्लभ भाई पटेल को
  • राजस्थान में क्षेत्रफल में सबसे बड़ी रियासत- जोधपुर (मारवाड़) ( Jodhpur )
  • छोटी- शाहपुरा
  • जनसंख्या में बड़ी रियासत- जयपुर ( Jaipur )
  • छोटी- शाहपुरा
  • सबसे पुरानी रियासत- मेवाड़(उदयपुर)
  • सबसे नई – झालावाड़ रियासत (झालावाड़ को अंग्रेजों ने कोटा से अलग करके रियासत बनाया था)
  • अंग्रेजों की बनाई रियासत- झालावाड़ (एकमात्र)
राजस्थान सामान्य ज्ञान
राजस्थान सामान्य ज्ञान
  • किस रियासत ने सबसे पहले अंग्रेजों से संधि की थी- करौली ने 15 नवंबर 1817 को
  • दूसरे नंबर पर कोटा ( Kota ) ने दिसंबर 1817 में संधि की थी
  • राजस्थान में सबसे आखिर में किसने अंग्रेजों से संधि की थी- सिरोही ने सितंबर 1823
  • सबसे पहले शिकार एक्ट कानून किसने बनाया – 1901 में टोंक रियासत ने
  • सबसे पहले डाक टिकट- 1904 में जयपुर ने (माधोसिंह द्वितीय ने)
  • पहली लोकतांत्रिक शासक की व्यवस्था स्थापित करने वाली रियासत – शाहपुरा
  • किस रियासत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को नहीं अपनाया था- जैसलमेर
  • वन्य जीवों के लिए सबसे पहले कानून किसने बनाया था- जोधपुर ( Jodhpur ) रिसायत ने 1910 में
  • सबसे पहले वन्य अधिनियम किसने बनाया – 1935 में अलवर ने
  • शिक्षा पर रोक लगाने वाली पहली सियासत कौन थी- डूंगरपुर
  • राजस्थान का अंडमान किस रियासत को कहा जाता था- जैसलमेर ( Jaisalmer )

ये रियासतें राजस्थान में नहीं मिलना चाहती थी

आपको बता दें कि टोंक और जोधपुर ऐसी दो रियासतें थी जो आजादी के समय पाकिस्तान के साथ मिलना चाहती थी. तो वहीं जैसलमेर ( Jaisalmer ) रियासत ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग नहीं लिया था. इसके अलावा भरतपुर, धौलपुर और अलवर रियासतें राजस्थान के साथ नहीं मिलना चाहती थी. ये तीनों रियासतें भाषायी आधार पर उत्तर प्रदेश के साथ मिलना चाहती थी. इसके अलावा डूंगरपुर रियासत भी राजस्थान में नहीं मिलना चाहती थी. बांसवाड़ा के शासक ने देश के साथ एकीकरण पत्र पर हस्ताक्षर करते समय चौकाने वाला बयान दिया था. वहां के शासक चंद्रवीर सिंह ने कहा था कि मैं अपने डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहा हूं. आजादी के समय 562 रियासतों में से सिर्फ 2 ही मुस्लिम रियासतें थी. राजस्थान की टोंक और गुजरात की पालनपुर रियासतें मुस्लिम रियासतें थी.

10 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाली रियासत

आजादी के समय एक नियम बनाया गया था कि जिस रियासत की जनसंख्या ( Population ) 10 लाख से ज्यादा हो. और उस रियासत की आमदनी साला एक करोड़ रूपए हो तो वो स्वतंत्र रहने का भी फैसला ले सकती है. इस नियम (शर्त) को बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर और जयपुर रियासत पूरा कर रही थी.

अलवर रियासत ने नहीं मनाया था स्वतंत्रता दिवस

अलवर एक ऐसी रियासत थी जिसने देश का पहला स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया था. अलवर ( Alwar ) विवादित रियासत भी रही है. पहले उसने स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया तो वहीं बाद में अलवर रियासत का नाम महात्मा गांधी की हत्या में भी जुड़ा था. अलवर के राजा तेजसिंह और दीवान एम.बी खरे को दिल्ली में नजरबंद किया गया था.

अलवर महाराजा तेज सिंह का नाम गांधीजी की हत्या में जुड़ा
अलवर महाराजा तेज सिंह का नाम गांधीजी की हत्या में जुड़ा

राजस्थान का एकीकरण

ये पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ राज्य था. यहां पर राजशाही शासन रहा था. लिहाजा इस प्रदेश को देश के साथ मिलाना इतना आसान नहीं था. टोंक और जोधपुर रियासत भारत के साथ मिलने को तैयार नहीं थी. तो वहीं जैसलमेर रियासत पर भी जोधपुर का असर था. लिहाजा अगर जोधपुर पाकिस्तान के साथ मिलता तो जैसलमेर भी पाकिस्तान के साथ मिल जाता. राजस्थान का एकीकरण कुल 7 चरणोें में हुआ था.

राजस्थान एकीकरण सामान्य ज्ञान
राजस्थान एकीकरण सामान्य ज्ञान
  • चरण- 7 चरणों में एकीकरण
  • एकीकरण में कुल समय- 8 साल, 7 महीने और 14 दिन
  • एकीकरण 7 चरणों में हुआ था लेकिन सबसे प्रमुख चरण 30 मार्च 1949 को था. इसीलिए 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता है.
  • 30 मार्च 1949 को चार बड़ी रियासतों- जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर को राजस्थान में मिलाया गया था. इन रियासतों को मिलाकर राज्य का नाम वृहत राजस्थान रखा गया था…..
  • राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य था और इसमें 19 रियासतों के साथ 3 ठिकाने थे और एक केंद्र शासित प्रदेश था. ऐसे में इसका एकीकरण एक साथ करना मुश्किल था. इसलिए रियासती विभाग के मुखिया सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 7 चरणों में एकीकरण किया. इसमें 8 साल 7 महीने, 14 दिन का समय लगा. एकीकरण का काम 18 मार्च 1948 को शुरू हुआ और 1 नवंबर 1956 को पूरा हुआ.
  • एकीकरण की शुरूआत अलवर रियासत के साथ हुई. एकीकरण सिरोही, अजमेर मेरवाड़ा के विलय के साथ एकीकरण पूरा हुआ. राजस्थान का एकीकरण सात चरणों में हुआ

राजस्थान के एकीकरण के चरण

एकीकरण का पहला चरण

18 मार्च 1948 को मतस्य संघ बनाया गया.
इस चरण में धौलपुर, भरतपुर,अलवर और करौली रियासतों के अलावा नीमराना ठिकाने का विलय किया गया था.
अलवर को मत्स्य की राजधानी बनाया गया था.
इका उद्घाटन एन.वी गाडगिल ने किया था.
शोभाराम कुमावत को अलवर का प्रधानमंत्री बनाया गया था.
धौलपुर शासक उदयभान सिंह को राजप्रमुख बनाया था. नोटः 1956 से पहले राज्यपाल की जगह राजप्रमुख का पद ही हुआ करता था
मत्स्य संघ नामकरण के.एम मुंशी ने किया था.

एकीकरण का दूसरा चरण

इसमें कुछ रियासतों को मिलाकर पूर्व राजस्थान संघ नाम रखा गया
तारीख- 25 मार्च 1948
इसमें बूंदी, कोटा, शाहगढ़, झालावाड़, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, किशनगढ़ के अलावा बांसवाड़ा के कुशलगढ़ ठिकाने और टोंक के लावा ठिकाने को मिलाकर पूर्व राजस्थान संघ बनाया गया था.
मतस्य संघ की तरह इसका उद्घाटन भी एन.वी. गाडगिल ने किया था. शाहपुरा के शासक गोकुल लाल ओसवा को प्रधानमंत्री (मुख्यमंत्री) बनाया गया.
कोटा शासक भीमसिंह को पूर्व राजस्थान संघ का राजप्रमुख बनाया गया.
बूंदी के राजा बहादुरसिंह को उपराजप्रमुख बनाया गया.

एकीकरण का तीसरा चरण

तीसरा चरण- संयुक्त राजस्थान
तारीख- 18 अप्रैल 1948
उदयपुर रियासत को पूर्व राजस्थान संघ में मिलाया गया और इसका नाम संयुक्त राजस्थान कर दिया.
उदयपुर को संयुक्त राजस्थान की राजधानी बनाया गया. इसका उद्घाटन उस वक्त देश के शासन प्रमुख पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया.
उदयपुर महाराजा भूपालसिंह को राजप्रमुख बनाया गया.
कोटा शासक भीमसिंह को उपराजप्रमुख बनाया गया.

एकीकरण का चौथा चरण

चौथा चरण- वृहत राजस्थान
ये सबसे महत्वपूर्ण चरण था. जब 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर रियासतों को संयुक्त राजस्थान में मिलाया गया. और इसका नाम वृहत राजस्थान रखा गया.
चौथे चरण के बाद जयपुर को राजधानी बनाया गया. इसका उद्घाटन उस वक्त के देश के गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया. हीरालाल शास्त्री को प्रधानमंत्री (मुख्यमंत्री) बनाया. इसलिए 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता है. और हीरालाल शास्त्री को पहला मुख्यमंत्री कहते है.
उदयपुर महाराजा भूपाल सिंह को वृहत राजस्थान का महाराजप्रमुख बनाया और जयपुर महाराजा मानसिंह द्वितीय को राजप्रमुख बनाया. इसके अलावा कोटा के राजा भीमसिंह को उपराजप्रमुख बनाया.

एकीकरण का पांचवा चरण

पांचवा चरण- विलय के इस चरण के बाद संयुक्त वृहत राजस्थान नाम दिया गया.
15 मई 1949 को मतस्य संघ को भी वृहत राजस्थान में मिलाया गया. मतस्य संघ के विलय के अलावा इसमें कोई खास बदलाव नहीं किया गया. जयपुर को ही राजधानी रखा गया. सवाई मानसिंह को राजप्रमुख रखा गया. और हीरालाल शास्त्री ही प्रधानमंत्री (मुख्यमंत्री) के पद पर बने रहे.

एकीकरण का छठा चरण

सिरोही को मिलाकर इसका नाम राजस्थान संघ रखा गया
26 जनवरी 1950 को सिरोही को मिलाया गया. और इसी दिन राजस्थान नाम रखा गया.
मुख्य पदों पर वही लोग रहे जो चौथे चरण में थे. मानसिंह द्वितीय ही राजप्रमुख बने रहे. हीरालाल शास्त्री मुख्यमंत्री के पद पर बने रहे. और राजधानी भी जयपुर ही बनी रही.

एकीकरण का सातवां चरण

1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर अजमेर-मेरवाड़ा और आबू-देलवाड़ा को राजस्थान में मिलाया गया.
एमपी के मंदसौर जिले का सुनेल टप्पा गांव भी Rajasthan में शामिल किया गया.
हमारे सिरोंज उपखंड को मध्यप्रदेश में शामिल कर दिया गया.
मोहनलाल सुखाड़िया इस वक्त राजस्थान के मुख्यमंत्री थे.
1956 में ही राजप्रमुख का पद समाप्त कर उसकी जगह राज्यपाल का पद सृजित किया गया. और गुरूमुख निहाल सिंह यहां का पहला राज्यपाल बनाया.

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