नजरिया: नाकामियों पर पर्दा डाल रही गहलोत सरकार !

17 दिसंबर 2018 को राजस्थान में जब कांग्रेस की सरकार बनी. तो किसानों को उम्मीदें थी. क्योंकि चुनावों में राहुल गांधी ने 10 दिन में कर्जमाफी का वादा किया था. इसके अलावा भी कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कई वादे किए थे. चाहे वो बिजली कीमतें न बढ़ाने का वादा हो. या हर बेरोजगार युवा को बेरोजगारी भत्ता देने की बात हो. लेकिन अशोक गहलोत ( Ashok gehlot ) सरकार ने कोई भी वादा पूरी तरह से नहीं निभाया आज तक.

अब मीडिया मैनेज कर रहे Ashok gehlot

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Ashok gehlot ) ने एक साल पूरे होने पर जयपुर के जवाहर कला केंद्र में प्रदर्शनी का आयोजन किया. जिसमें 20 विभागों की 46 प्रदर्शनी का लोकार्पण किया. इसके बाद मीडिया से बात करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि अगर विज्ञापन चाहते हो तो हमारी खबर दिखाओ. मुख्यमंत्री ने सभी मीडिया वालों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो हमारे खिलाफ खबर दिखाएगा. उसे विज्ञापन नहीं मिलेंगे. साफ संकेत है कि अगर आप हमारे पक्ष की खबर दिखाएंगे तभी विज्ञापन मिलेगा.

Ashok gehlot ने नहीं की संपूर्ण कर्जमाफी

राहुल गांधी और अशोक गहलोत ( Ashok gehlot ) ने सबसे बड़ा वादा किसानों से कर्जमाफी का किया था. इसी उम्मीद के साथ राजस्थान के लाखों किसानों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया था. लेकिन हकीकत ये है कि ये वादा आज भी पूरा नहीं हो पाया है. सरकार ने 59 लाख किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था. लेकिन सिर्फ 18 लाख किसानों की कर्जमाफी हुई. वो भी पूरी कर्जमाफी नहीं हुई. उसमें भी ऐसी शर्तें लगाई गई कि ज्यादातर किसानों की आधे से भी कम पैसे माफ हुए.

कृषि कनेक्शन, अकाल राहत और बीमा योजना में फेल साबित

सत्ता में आने से पहले गहलोत सरकार ने किसानों को एक लाख कृषि कनेक्शन का वादा किया था. आज वो भी इतने कनेक्शन देने का वादा कर रही है. जबकि हकीकत तो ये है कि सरकार ने सिर्फ 18 हजार कनेक्शन दिए है. तो क्या ये मान लिया जाए कि सियासी पार्टियां झूठ के दम पर सत्ता चलाएगी.

कांग्रेस ने किसानों से वादा किया था कि सत्ता में आते ही अकाल राहत कोष बनाया जाएगा. लेकिन अभी तक इस बारे में कोई काम नहीं हुआ है. और अकाल राहत कोष नहीं बन पाया है. अगर अकाल राहत कोष बनता है तो प्रदेश में लाखों किसानों को अकाल के हालात में बड़ी मदद मिलेगी
इसके अलावा पेंशन और बीमा योजना पर भी सरकार झूठा साबित हो रही है. गहलोत सरकार ने किसानों को वृद्ध किसान पेंशन देने का वादा किया था. लेकिन एक साल बीत जाने के बाद वो वादा भी झूठा निकला. और सरकार किसानों को पेंशन नहीं दे पाई.

केंद्र की मोदी सरकार ने देशभर के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ दिया है. लेकिन राजस्थान के 22 लाख किसानों को उसका अभी तक लाभ नहीं मिला है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कई बार आरोप लगा चुके है कि राजस्थान की गहलोत सरकार ने अभी तक किसानों की सूची केंद्र सरकार को भेजी ही नहीं है. मोदी सरकार ने कई बार किसानों की सूची मांगी लेकिन वो नहीं दी गई. तो क्या गहलोत सरकार किसानों को राजनीतिक दुराभाव का शिकार बना रही है.

कानून व्यवस्था बिगड़ी

मुख्यमंत्री बनने के बाद अशोक गहलोत ( Ashok gehlot ) ने गृह विभाग अपने पास रखा. लिहाजा कानून व्यवस्था उनकी जिम्मेदारी थी. लेकिन पिछले एक साल में प्रदेश में 1 लाख 76 हजार अपराधिक मामले दर्ज हुए है. अलवर में दुष्कर्म की घटना हो. या टोंक के मालपुरा में हुए सांप्रदायिक दंगे हो. गहलोत सरकार कानून व्यवस्था संभालने में नाकाम साबित हुई है. हालात ये है कि महिला उत्पीड़न के जितने भी मामले दर्ज हुए. सिर्फ 6 फीसदी महिलाओं को ही न्याय मिल पाया है. बाकी की 94 प्रतिशत महिलाओं को न्याय नहीं मिला है

युवाओं के साथ छलावा

गहलोत सरकार ने सत्ता में आने से पहले सभी बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था. लेकिन कर्जमाफी की तरह इसमें भी खेल कर दिया. प्रदेश में करीब 27 लाख बेरोजगार है. लेकिन सिर्फ 32 हजार को ही भत्ता मिल रहा है. जो कि 2 प्रतिशत से भी कम है. तो क्या बाकी के 98 प्रतिशत बेरोजगारों के साथ छलावा हुआ है.

योजनाओं के नाम बदलने पर रहा ध्यान

गहलोत सरकार ने सत्ता में आते ही ये कहा था कि पिछली सरकार की योजनाओं को नहीं बदलेंगे. लेकिन पिछले एक साल में कई योजनाओं को बदला गया. भामाशाह योजना के ऊपर सिर्फ नाम बदलकर अपना ठप्पा लगा दिया. भामाशाह योजना का कार्ड बदला जा रहा है. इसमें करीब 18 करोड़ रूपए का खर्च आएगा. तो क्या सिर्फ योजना का नाम इसलिए बदल रहा है कि उसके साथ बीजेपी सरकार का नाम जुड़ा हुआ था.

कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले 519 वादे किए थे. लेकिन उसमें से सिर्फ 119 की ही अभी तक चर्चा की है. तो फिर सवाल ये है कि बाकी के 400 वादों को कूड़ेदान में क्यों डाल दिया. क्या उन वादों पर सरकार पलटने की तैयारी कर रही है.

ध्यान भटकाने की कोशिश है नई योजना ?

सरकार ने किसान कर्जमाफी की लेकिन वो भी पूरी नहीं हुई. बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की लेकिन वो भी पूरी नहीं हुई. अब सरकार तमाम मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए निरोगी राजस्थान योजना ला रही है. लेकिन सवाल यहां भी रही है कि क्या जमीनी स्तर पर ये योजना लागू हो पाएगी. या फिर केवल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी. या बीजेपी ( bjp ) को हमला करने का नया मौका देगी. एक सवाल ये भी है कि गहलोत सरकार में उपमुख्यमंत्री होने के बावजूद सचिन पायलट ( sachin pilot ) को उतनी तवज्जो क्यों नहीं मिलती.

नोटः- लेख और नजरिया लेखक का व्यक्तिगत राय पर निर्भर है.

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