Geneva convention जेनेवा संधि क्या है और उसके क्या नियम है

जेनेवा संधि क्या है Geneva convention
जेनेवा संधि क्या है Geneva convention

इस दुनिया ने मानव इतिहास के दो सबसे विध्वंसकारी युद्धों का सामना किया। पहला विश्व युद्ध और दूसरा विश्व युद्ध। पहला विश्व युद्ध 28 जुलाई 1914 को शुरू हुआ। 11 नवंबर 1919 को युद्ध समाप्त हुआ। इसमें एक करोड़ लोगों की मौत हुई। दो करोड़ के करीब लोग घायल हुए और करोड़ों लोग कुपोषण और महामारी के शिकार हुए। इसी से जेनेवा संधि ( Geneva convention ) नींव पड़नी शुरू हुई।

दूसरा विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 को शुरू हुआ। ये युद्ध 14 अगस्त 1945 तक चला। इसमें 10 करोड़ सैनिकों ने भाग लिया। और करीब 7 करोड़ लोगों की मौत हुई। मरने वालों में ज्यादातर आम नागरिक थे। दुनियाभर के देशों ने अपनी आर्थिक, वैज्ञानिक और औद्योगिक ताकत को इस युद्ध में लगा लिया।

दूसरे विश्व युद्ध में जिस तरह से आम नागरिकों की मौत हुई। युद्ध बंदियों के साथ बुरा बर्ताव हुआ। उसी को देखते हुए एक ऐसी संधि पर चर्चा हुई। जिसमें युद्ध बंदियों और आम नागरिकों को मानवीय सम्मान देने की बात तय हुई।

जेनेवा संधि क्या थी

इस संधि ( Geneva convention ) को आखिर रूप देने के लिए कई संधियां पहले भी हुई थी। मानवता को बनाए रखने की पहली संधि 1864 में हुई। इसके बाद 1906 और 1929 में भी हुई लेकिन कामयाब नहीं हो पाई। 1949 में चौथी बार इस संधि को और मजबूत करने के लिए दुनिया के देश इकट्ठा हुए। और पिछली तीन बार की शर्तों के साथ कुछ नए नियम जोड़कर युद्ध बंदियों के साथ मानवीय व्यवहार को सुनिश्चित किया।

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जेनेवा संधि के चार चरण

जेनेना संधि ( Geneva convention ) 1864 ( पहला चरण)

22 अगस्त 1864 को सम्मेलन हुआ। इसमें चार संधियों और 3 प्रोटोकल की बात की गई। जिसके तहत युद्ध में घायल और बीमार सैनिकों को सुरक्षा देने की बात हुई। एक बात ये भी तय हुई कि डॉक्टरों, धार्मिक लोगों और एंबुलेंस सेवाओं को युद्ध के दौरान कोई भी देश नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

जेनेवा संधि 1906 ( दूसरा चरण ) ( Geneva convention )

1906 में इसके दूसरे चरण में समुंद्री युद्ध और उसके नियमों की बात की गई। समुंद्र में युद्ध के वक्त घायल हुए, बीमार पड़े और युद्ध के दौरान जलपोत के सैन्य कर्मियों की रक्षा और अधिकारों को लेकर नियम बनाए गए।

जेनेवा संधि 1929 ( तीसरा चरण ) ( Geneva convention )

1929 में संधि के तीसरे चरण में युद्ध बंदियों के अधिकारों की बात हुई। यानि युद्ध के दौरान बंदी बनाए गए सैनिकों के साथ कैसा व्यवहार होगा और उसके क्या अधिकार होंगे। इसमें कैद की स्थिति और स्थान के बारे में नियम बनाए गए। साथ ही युद्ध बंदियों के श्रम, वित्तिय संसाधनों के साथ साथ उन्हैं राहत देने और न्यायिक कार्रवाई कैसे होगी। इस बारे में नियम बनाए गए। इसमें युद्ध बंदियों को बिना देरी किए रिहा करने के भी नियम बनाए गए।

जेनेवा संधि 1949 ( चौथा चरण ) ( Geneva convention )

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जेनेवा में चौथी बार दुनिया भर के देश इकट्ठा हुए। इसमें इस बात के नियम बनाए गए कि युद्ध के वक्त आम नागरिकों के क्या क्या अधिकार होंगे। ये बात स्पष्ट कर दी गई कि किसी भी देश के युद्ध में आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। और आम आदमी के अधिकारों का भी उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

इस संधि के चौथे चरण में हुई चर्चा के बाद बने नए नियमों को 21 अक्टूबर 1950 को लागू किया गया। आज के वक्त में जेनेवा संधि को मानने वाले दुनिया भर के 194 देश है.। संयुक्त राष्ट्र संघ के लगभग सभी देश इस संधि को मानते है।

जेनेवा संधि ( Geneva convention ) के नियम

  • अनुच्छेद-3 के अनुसार घायल युद्ध बंदी का अच्छे तरीके से इलाज होना चाहिए।
  • युद्ध बंदियों के साथ बर्बर व्यवहार नहीं होना चाहिए. उन्हैं बिना भेदभाव के साथ मानवाधिकारों के तहत कानूनी सुविधा मिलनी चाहिए।
  • इस संधि में युद्ध क्षेत्र में घायलों की देखभाल और आम नागरिकों की पूरी सुरक्षा की बात की गई है।
  • संधि के तहत घायल सैनिकों को खाने-पीने से लेकर सभी जरूरी चीजें दी जाएगी।
  • घायल सैनिकों का पूरी तरीके से इलाज कराया जाएगा।
  • किसी भी देश का सैनिक अगर युद्ध जैसे हालात में दूसरा देश पकड़ लेता है तो पकड़ते ही उस पर ये संधि लागू होती है। चाहे वो पुरूष हो या स्त्री।
  • युद्ध बंदी को डराया या धमकाया नहीं जा सकता और उसे धर्म, जाति के बारे में न तो पूछा जा सकता और न ही उसके आधार पर उससे व्यवहार होना चाहिए।

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