प्रथम विश्व युद्ध क्यों हुआ था और परिणाम क्या रहा ?

प्रथम विश्व युद्ध. एक ऐसा युद्ध जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका में लड़ा गया था. लेकिन बड़ी संख्या में जन हानि की वजह से इसे विश्व युद्ध कहते है. ये युद्ध करीब 52 महीने तक चला. और इसमें दुनिया की आधी आबादी हिंसा की चपेच में आई. 28 जुलाई 1914 को युद्ध शुरू हुआ. 11 नवंबर 1919 को युद्ध समाप्त हुआ. इसमें एक करोड़ लोगों की मौत हुई. दो करोड़ के करीब लोग घायल हुए और करोड़ों लोग कुपोषण और महामारी के शिकार हुए.

प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के साथ अमेरिका महाशक्ति के रूप में उभरा. दुनिया के चार बड़े सम्राज्य बिखर गए. जिसमें रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी (हैप्सबर्ग) और उस्मानिया शामिल थे. जर्मनी ने इस युद्ध में जहरीली गैसो का उपयोग किया. इसी वजह से जिनेवा संधि लागू की गई.

युद्ध के बाद पेरिस शांति सम्मेलन में जर्मनी पर 28 जुलाई 1919 को वर्साय संधि थोप दी गई. इस सम्मेलन में 27 देश शामिल हुए थे. जिसमें अमेरिका, इंग्लैंड और फ्रांस मुख्य रूप से थे.

प्रथम विश्व युद्ध के कारण

दुनिया भर में औद्योगिक क्रांति चल रही थी. इस वजह से हर ताकतवर देश दूसरे देश पर कब्जा करना चाह रहा था. ताकि वहां से कच्चा माल मिल सके. इस वजह से देशों में टकराव बढ़ने लगा.

इसके लिए दुनियाभर के देशों ने सेनाएं बढ़ाई. सेना को ताकतवर बनाया गया. दूसरे देशों के साथ गुप्त संधियां की गई. गुप्त संधियों की इस नीति का जनक बिस्मार्क को माना जाता है.

प्रथम विश्व युद्ध की संधियां

बिस्मार्क जर्मन सम्राज्य का पहला शासक था. वो यूरोप का बहुत ताकतवर शासक था. और उसने छोटे छोटे सम्राज्यों को एक कर एक बड़ा जर्मन सम्राज्य बनाया. बिस्मार्क अपनी दमदार विदेश नीति और शासन नीति के कारण चर्चित था

फ्रांस-जर्मनी की दुश्मनी- इन दो देशों की दुश्मनी भी पहले विश्व युद्ध का बड़ा कारण थी. जर्मनी के एकीकरण के समय बिस्मार्क ने फ्रांस के अल्सेस लॉरेन पर कब्जा कर लिया था. इस वजह से फ्रांस के लोग जर्मनी के प्रति नफरत रखते थे. और हमेशा जर्मनी को नीचा दिखाने की कोशिश की जाती थी.

28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया के राजकुमार र्चड्युक फर्डिनेंड(Archduke Ferdinand) और उनकी पत्नी की हत्या इस युद्ध का सबसे तात्कालिक कारण था. जिसके बाद ऑस्ट्रिया और सर्बिया के बीच युद्ध हो गया.

इस युद्ध में रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन सर्बिया की मदद की. और जर्मनी ने ऑस्ट्रिया की मदद की. कुछ समय बाद जापान ब्रिटेन की ओर से सर्बिया की मदद में उतरा. तो वहीं उस्मानिया जर्मनी की ओर से इस युद्ध में शामिल हो गया. इस तरह धीरे धीरे कई देश इस युद्ध में शामिल हो गए

प्रथम विश्व युद्ध में भारत की भूमिका

पहले विश्व युद्ध के समय भारत पर ब्रिटेन का अधिकार था. देश में कांग्रेस और मुस्लिम लीग जैसी पार्टियों के साथ राजे रजवाड़ों का राज था. उदारवादी नेताओं ने ब्रिटेन का इस युद्ध में साथ दिया. साथ इस उम्मीद के साथ दिया कि युद्ध समाप्ति के बाद ब्रिटेन भारत की स्वराज की मांग पूरी करेगा. 13 लाख भारतीय जवान ब्रिटेन की तरफ से युद्ध लड़े. और 50 हजार सैनिक शहादत को प्राप्त हुए.

तीसरे एंग्लो अफगान युद्ध और पहले विश्व युद्ध की याद में ही दिल्ली में इंडिया गेट का निर्माण किया गया था.

बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने युद्ध के समय ब्रिटेन के लिए धन और सिपाहियों की भर्ती के लिए देशभर में गांवों का दौरा किया. वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने चालाकी दिखाते हुए भारत का पूरा समर्थन लिया. हालांकि युद्ध के बाद भारत को कोई फायदा नहीं हुआ.

इसी बीच ब्रिटेन ने टर्की के मुस्लिम शासक पर हमला कर दिया. जिसे दुनियाभर के मुसलमान खलिफा मानते थे. भारत में मुस्लिम लीग के नेता इस बात से ब्रिटेन से नाराज हो गए. और मुसलमानों ने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ रूख अपना लिया. मुस्लिम लीग और कांग्रेस में दोस्ती बढ़ने लगी. बाद में असहयोग आंदोलन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया था.

अमेरिका की पहले विश्व युद्ध में भूमिका

वैसे तो अमेरिका काफी समय तक इस युद्ध से अलग रहा. साल 1917 तक अमेरिका इस युद्ध में शामिल नहीं हुआ. अमेरिका ने मित्र राष्ट्रों के प्रति सहानुभुति रखी. लेकिन इसी बीच जर्मनी ने एक ब्रिटिश जहाज लुसितानिया को डुबो दिया. अंटलांटिक महासागर में हुई इस घटना में 1200 लोग मारे गए थे. इस जहाज में अमेरिकी यात्री भी सवार थे. इस बात से अमरिका जर्मनी से नाराज हो गया. 6 अप्रैल 1917 को अमेरिका ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी.

असल में जर्मनी ने एक पनडब्बी तैयार की थी जिसका नाम था यू बोट. इस यू बोट पनडुब्बी ने समुंद्री जहाजों पर हमला शुरू किया. पहले तो सिर्फ नेवी जहाजों पर हमले किए लेकिन बाद में सिविल जहाजों पर भी हमले शुरू कर दिए थे.

1917 में एक तरफ अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ. तो वहीं सोवियत रूस 1917 में इस युद्ध से अलग हो गया. रूस में बोल्शेविक क्रांति के बाद लेनीन सरकार ने खुद को युद्ध से अलग करने की घोषणा की. सोवियत संघ ने जर्मनी के साथ संधी कर अलग हो गया.

अमेरिका के युद्ध में शामिल होने और रूस के अलग होने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदले. मित्र राष्ट्र लगातार जीतने लगे. अक्टूबर 1918 में तुर्की और नवंबर 1918 में ऑस्ट्रिया ने आत्मसमर्पण कर दिया. इन दो देशों के आत्मसमर्पण करने से जर्मनी अकेला पड़ गया. जर्मनी भी कमजोर पड़ रहा था. आर्थिक स्थिति बिगड़ रही थी. जर्मनी के अंदर ही युद्ध के खिलाफ विद्रोह होने लगा. आखिरकार जर्मन सम्राट कैजर विलियम द्वितीय को गद्दी छोड़नी पड़ी. विलियम भागकर जर्मनी चले गए. इसके बाद जर्मनी में वेमर गणतंत्र की स्थापना हुई. और नई सरकार ने 11 नवंबर 1918 को युद्ध विराम की घोषणा कर दी.

प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम

इस युद्ध में सभी देशों के करीब एक करोड़ सैनिक मारे गए जबकि दो करोड़ घायल हुए. इस युद्ध के बाद पेरिस समझौता हुआ जिसमें सभी पुरानी संधियों को खत्म किया गया. आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म किया गया. समुंद्री स्वतंत्रता कायम की गई. ये भी तय हुआ कि वैज्ञानिक खोज के गलत उपयोग मावन जाति के लिए घातक है. साथ ही तुर्की में गैर तुर्कों को स्वायत्त शासन से लेकर स्वतंत्र पौलेंड के निर्माण जैसे फैसले लिए गए.

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