महाराष्ट्र में बीजेपी का खेल कैसे बिगड़ा ?

महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते रिश्ते और बदलते गठबंधन की वजह से आए दिन दिलचस्प होती जा रही है. राजनीति का चरित्र पल पल बदल रहा है लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल ये है कि बीजेपी के साथ आने वाले अजित पवार ने घर वापसी क्यों की, शरद पवार ( sharad pawar ) से हाथ क्यों मिलाया और बीजेपी कैसे इस खेल में मात खा गई

अजित पवार का खेल क्या था ?

दरअसल पिछले लंबे समय से अजित पवार को NCP में ज्यादा तवज्जो नहीं मिल रही थी और शरद पवार ( sharad pawar ) परिवार के दूसरे सदस्यों को आगे बढ़ा रहे थे. कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना गठबंधन सरकार में डिप्टी सीएम पद के लिए भी अजित पवार के नाम पर सहमति नहीं बन रही थी तो वहीं शरद पवार पार्टी की कमान अब सुप्रिया सुले के हाथों में देने की तैयारी कर रहे थे. इसके अलावा सिंचाई घोटाले समेत कई मामलोें में वो जांच एजेंसियों के निशाने पर भी थे ऐसे में अजित पवार ने एक बड़ा दांव खेलते हुए बीजेपी के पाले में चले गए और देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात कर 54 विधायकों के समर्थन वाली चिट्ठी सौंपते हुए सरकार बनाने की पेशकश की. यहां बीजेपी ने धैर्य से सोचने की बजाय जल्दबाजी में सरकार बना ली. रात 9 बजे अजित पवार गठबंधन की बैठक से निकले, साढ़े 9 बजे फड़नवीस ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया, रात 12 बजे अजित पवार ने राज्यपाल से मुलाकात की, सुबह 5.47 बजे राष्ट्रपति शासन हटा और 8 बजे फड़नवीस के साथ अजीत पवार ने शपथ ली.

अजित पवार कमजोर कैसे पड़े ?

शपथ ग्रहण के साथ ही शरद पवार ( sharad pawar ) ने कमान संभाली और तुरंत अपने विधायकों को इकट्ठा किया. करीब 40 विधायक शरद पवार के पाले में पहुंच गए, इसके बाद शुरू हुई उन विधायकों की तलाश जो अजीत पवार के पाले में चले गए थे, इनमें से 4 विधायक गुड़गांव के एक होटल में मिले, शाम होते होते 54 में से करीब 50 विधायक शरद पवार ( sharad pawar ) के पास पहुंच गए लेकिन फिर भी अजित पवार को एक दांव पर भरोसा था और वो दांव का पार्टी विधायक दल का नेता होने के नाते व्हीप जारी करना. अजीत पवार को लगता था कि उनका व्हीप ही मान्य होगा ऐसे में विधायक उनके खिलाफ मतदान नहीं कर सकतेएक बैठक ने बदला पूरा खेल

अजित पवार ने भले ही शपथ ले ली लेकिन न तो उन्हौने कार्यभार संभाला और न ही वर्ल्ड बैंक के साथ हुई महाराष्ट्र सरकार की बैठक में शामिल होने पहुंचे. सोमवार को 26/11 की बरसी पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पहुंचना था लेकिन बीच रास्ते में उनकी गाड़ी एक होटल की तरफ मुड़ गई जहां उनकी बैठक शरद पवार ( sharad pawar ) , सुप्रिया सुले, प्रफुल्ल पटेल और जयंत पाटिल जैसे नेताओं के साथ हुई. शरद पवार ने उनके सामने कई बातें कही,

मैं तुमसे नाराज नहीं हुं, तुम वापिस आ जाओ, तुम्हैं वही सम्मान मिलेगा, तुम अगर सोच रहे हो कि तुम्हारा व्हीप चलेगा तो ऐसा नहीं होने वाला है, और अगर खुद को पार्टी विधायक दल का नेता मानते हो तो मैं एनसीपी बी बना सकता हूं, ऐसे में 54 में से 51 विधायक मेरे साथ है और तुम सरकार नहीं बना सकते, या तो तुम अभी वापिस आ जाओ या फिर फ्लोर टेस्ट के समय किनारा कर लेना

शरद पवार, एनसीपी प्रमुख

अजित पवार इन सब बातों को सुनते रहे और चुपचाप बैठे रहे, इसी बीच सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल ने भी अजीत पवार को समझाने की कोशिश, बैठक के बाद अजीत पवार वहां से चुपचाप चले गए और फड़नवीस से मुलाकात की. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का भी फैसला आ चुका था. लोगों को लगा कि शायद अब फ्लोर टेस्ट पर रणनीति बनाने के लिए बैठक हो रही है जबकि इस बैठक में अजित पवार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था.

बीजेपी को क्या नुकसान ?

वैसे बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वो किसी भी तरह की जोड़तोड़ नहीं करने वाली है, अजित पवार के समर्थन पत्र के दावे पर ही सरकार बनाई थी लेकिन फिर भी कहीं न कहीं बीजेपी की इस पूरे मामले में फजीहत है. पहले दिन जहां अमित शाह को इस पूरे घटनाक्रम में चाणक्य के रूप में देखा जा रहा था तो वहीं पीएम मोदी और अमित शाह की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे है ऐसे में नरेंद्र मोदी के लिए सोचने की बात है कि पार्टी जिस तरह से राज्यों में कमजोर हो रही है, क्या ऐसे में 2024 की नैया पार हो पाएगी

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