Chandryaan 2: चाँद के और करीब पहुंचा, भारत बड़ी उपलब्धि से कुछ दिन ही दूर !

ISRO 4 days to D-Day, World waits with bated breath for Chandrayaan 2
ISRO 4 days to D-Day, World waits with bated breath for Chandrayaan 2

आज चंद्रयान 2 (Chandryaan 2) ने अपना एक और पड़ाव बड़ी ही आसानी से पार कर लिया है और वो चाँद के और करीब पहुँच गया है। जैसा की आपको मालूम है इसरो (ISRO) ने चंद्रयान 2 को 22 जुलाई को श्री हरिकोटा से लांच किया था।

आज इसरो (ISRO) ने बताया कि चंद्रयान 2 (Chandryaan 2) को चंद्रमा की निचली कक्षा में उतारने का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। आपको बता दें की इसरो सात सितंबर को लैंडर विक्रम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने से पहले कल एक बार फिर यान को और निचली कक्षा में ले जाएगा।

आगे इसरो (ISRO) ने बताया की चंद्रयान-2 (Chandryaan 2) ऑर्बिटर चंद्रमा की मौजूदा कक्षा में लगातार चक्कर काट रहा है और ऑर्बिटर एवं लैंडर पूरी तरह से ठीक हैं। एक बार फिर चार सितंबर को भारतीय समयानुसार तड़के तीन बजकर 30 मिनट से लेकर चार बजकर 30 मिनट के बीच इसकी कक्षा में कमी की जाएगी।

वही 2 सितम्बर को चंद्रयान 2 ने अपना एक और पड़ाव बड़ी ही सफलता पूर्वक पार किया था, चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम कामयाबी के साथ अलग हो गया था। इस अलगाव के बाद विक्रम की चांद के दक्षिणी ध्रुव के हिस्से में उतरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि विक्रम चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर अब से पांचवें दिन यानी 7 सितंबर को करीब 1:55 बजे अपना कदम रखेगा।

आपको बता दें की चंद्रयान 2 दो बार भारत को चाँद की तस्वीरें भी भेजने में कामियाब रहा है, दरअसल इसरो ने आगे बताया, अलग होने के बाद विक्रम अब तक चंद्रमा की 119 किमी गुणा 127 किमी की कक्षा में चक्कर लगा रहा था।

वही इसरो के वैज्ञानिकों ने विक्रम आज सुबह 8:50 बजे चांद के बेहद करीब वाली कक्षा 36 गुणा 100 किमी के दायरे में दाखिल करा दिया है। इसके बाद चार सितंबर यानि कल उसे चांद की सतह पर उतारने के लिए तैयार किया जाएगा और उसके बाद अगले तीन दिनों तक विक्रम चांद के सबसे निकटवर्ती इस कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा। इसके बाद सतह पर उतरने की प्रक्रिया शुरू होगी।

चंद्रयान 2 की खासियत !

चंद्रयान-2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वजन के लगभग बराबर है
इसमें 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे, इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा।
चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया
यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा।
भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की है अगर सब सही रहा तो इसरो के लिए ये एक बड़ी कामियाबी होगी।
चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले गया है।

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