मशहूर बिस्कुट कंपनी Parle-G पर पड़ी GST की मार, मंदी की गिरफ्त में कंपनी !

देश की मशहूर बिस्कुट कंपनी पार्ले-जी (Parle-G) मंदी की गिरफ्त में आ चुकी है, इससे दस हज़ार लोगो की नौकरी पर संकट आ गया है। वही कंपनी के मालिक का कहना है की सरकार ने जब से GST बढ़ाया है तब से कंपनी को काफी नुक्सान हुआ है।

आपको बता दें की पार्ले-जी (Parle-G) देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्कुट है और सबसे ज्यादा इसकी बिक्री ग्रामीण इलाको में होती है। लेकिन अब इसे बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट भी कमजोर डिमांड से जूझ रही है।

कैसे और कब बना पार्ले-जी (Parle-G) ?

1929 में भारत जब ब्रिटिश शासन के अधीन था, पार्ले प्रोडक्ट नामक एक छोटी कंपनी अस्तित्व में आई। मुंबई के उपनगर वीले-पार्ले में मिठाई तथा टॉफियों जैसे ( मेलोडी, कच्चा मैंगो बाईट आदि ) के उत्पादन के लिए एक छोटे कारखाने को स्थापित किया गया।

पार्ले प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित पार्ले-जी या पार्ले ग्लूकोज बिस्कुट भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय बिस्कुटों में से एक है। पार्ले-जी सबसे पुराने ब्रांड नामों में से एक होने के साथ-साथ भारत में सर्वाधिक बिक्री वाला बिस्कुट ब्रांड भी हैं।

पार्ले के आगे क्यों लगा “जी” ?

कंपनी का नारा है, जी का मतलब जीनियस (प्रतिभाशाली)। दरअसल “पार्ले-जी” नाम को उपनगरीय रेल स्टेशन विले पार्ले से लिया गया है, जो स्वयं पार्ले नामक पुराने गांव पर आधारित है (उसके निकट में इर्ले नामक एक क्षेत्र भी है जहां पार्ले एग्रो उत्पादन कारखाना आधारित है)।

पार्ले-जी विश्व में सर्वाधिक बिक्री वाला बिस्कुट है। भारत के ग्लूकोज बिस्कुट श्रेणी के 70% बाजार पर इसका कब्जा है, इसके बाद नंबर आता है ब्रिटानिया के टाइगर (17-18%) और आईटीसी के सनफीस्ट (8-9%) का नंबर आता है।

10000 लोग हो जाएंगे बेरोज़गार !

कंपनी हर साल 10 हजार करोड़ रुपये के बिस्किट की बिक्री करती है, पारले प्रोडक्ट के कैटेगिरी हेड मयंक शाह ने कहा कि हम सरकार से जीएसटी कम करने की मांग कर रहे हैं। 100 रुपये प्रति किलो की कीमत वाले बिस्किट पर सबसे ज्यादा जीएसटी लग रहा है।

दरअसल यह बिस्किट पांच रुपये के पैकेट में बेचा जाता है, इससे कंपनी की लागत भी नहीं निकल रही है, जिससे अब लोगों को निकालने के सिवा कोई और रास्ता नहीं बचा है। वही कंपनी के मालिक ने कहा की अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हमें अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ेगा।

देना पड़ रहा है ज्यादा टैक्स !

कंपनी का कहना है जीएसटी से पहले कंपनी को 12 फीसदी टैक्स देना होता था। हालांकि कंपनी को उम्मीद थी कि, प्रीमियम कैटेगिरी के लिए 12 फीसदी और सस्ते बिस्किट पर पांच फीसदी टैक्स लगेगा।

लेकिन अब सभी तरह के बिस्किट पर 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। इसके चलते कंपनियों को इनके दाम बढ़ाने पड़े, जिसका असर सेल्स पर पड़ा। मयंक शाह ने बताया कि पारले को भी 5 पर्सेंट दाम बढ़ाना पड़ा, जिससे सेल्स में गिरावट आई है। 

FMCG ने जारी की रिपोर्ट !

आपको बता दें कि पिछले महीने मार्केट रिसर्च कंपनी नीलसन ने देश के FMCG सेक्टर को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है, इसमें उन्होंने इस साल के लिए ग्रोथ का अनुमान घटाकर 9-10 फीसदी कर दिया है।

इससे पहले ग्राोथ का अनुमान 11-12 फीसदी था, रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक सुस्ती का असर फूड बिजनेस पर दिख रहा है। इस सेक्टर में सबसे बुरा हाल, नमकीन, बिस्किट, मसाले, साबुन और पैकेट वाली चाय पर है।

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