Chandrayaan 2 चाँद की कक्षा में हुआ स्थापित, ISRO के चीफ ने कहा बड़ी उपलब्धि !

Chandrayaan 2 sucessfully established in moon's orbit, ISRO Chief said big achievement for india
Chandrayaan 2 sucessfully established in moon's orbit, ISRO Chief said big achievement for india

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) को चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इसरो अध्यक्ष “के. सिवन” ने मीडिया को बताया की चंद्रयान 2 मिशन ने आज एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया।

वही अंतरिक्ष एजेंसी के बंगलूरू मुख्यालय ने एक बयान में कहा कि ‘लूनर ऑर्बिट इंसर्शन’ (एलओआई) प्रक्रिया सुबह नौ बजकर दो मिनट पर सफलतापूर्वक पूरी हुई। प्रणोदन प्रणाली के जरिए इसे संपन्न किया गया। इसरो ने कहा, ‘यह पूरी प्रक्रिया 1,738 सेकेंड की थी और इसके साथ ही चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया।’

उसके बाद इसरो अध्यक्ष “के. सिवन” ने बताया की अपेक्षित संवेग (Expected Velocity) से ज्यादा स्पीड अंतरिक्ष यान को गहरे अंतरिक्ष में उछाल देता, जबकि धीमी गति से चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण चंद्रयान 2 को अपनी ओर खींच लेता, जिससे यह उसकी सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता।

ऐसे में चंद्रयान-2 की वेलॉसिटी बिल्कुल ठीक होनी चाहिए थी और चंद्रमा पर ऊंचाई सटीक होनी थी, एंगल में एक छोटी सी गलती मिशन को खत्म कर सकती थी।

22 जुलाई को हुआ था चंद्रयान 2 लॉन्च

आपको बता दें की 22 जुलाई को चंद्रयान 2 को लॉन्च किया गया था जबकि इसे पहले 15 जुलाई को लॉन्च करना था लेकिन कुछ तकनीकी खराबी के कारण इसे 22 जुलाई को लॉन्च किया गया

22 जुलाई को करीब 6:43 बजे से इसकी लॉन्चिंग की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी, चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग भारत के ‘बाहुबली रॉकेट’ GSLV मार्क III से की गई थी। उसके बाद सिवन ने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि

वही अब इसका ‘अगला बड़ा इवेंट 2 सितंबर को होगा जब यह लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा, 3 सितंबर को हमारे पास लगभग 3 सेकंड के लिए एक छोटा मैनूवर होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लैंडर की प्रणालियां सामान्य रूप से चल रही हैं की नहीं।

भारत के लिए चंद्रयान 2 बड़ी उपलब्धि

दरअसल इसरो का यह अभी तक का सबसे जटिल और सबसे प्रतिष्ठित मिशन है, यदि सब कुछ सही रहता है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत, चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला चौथा देश बन जाएगा।

आपको बता दें की ‘चंद्रयान-2’ मिशन भारत के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई भी देश नहीं पहुँच पाया है, आपको बता दें की चंद्रयान 2 चांद के कई अनसुलझे रहस्य जानने में मदद करेगा और यह ऐसी नई खोज होगी जिसका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा।

आपको बता दें की पहले चंद्र मिशन 11 साल पहले चंद्रयान 1 को चाँद पर भेजा गया था, इस सफल परिक्षण के बाद इसरो ने भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-मार्क के जरिए 978 करोड़ रुपये की लागत से बने चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण किया है, स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान 2 में कुल 13 पेलोड हैं और आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं।

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