Amit Shah और Ajit Doval ने J&K को लेकर अधिकारियों के साथ की बैठक !

Amit Shah and Ajit Doval hold meeting on the issue of J&K situation
Amit Shah and Ajit Doval hold meeting on the issue of J&K situation

J&K से धारा 370 और धारा 35A को हटाने के बाद मोदी सरकार का अगला कदम अब क्या होगा ये किसी को नहीं मालूम, लेकिन जम्मू-कश्मीर को लेकर गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और NSA अजीत डोभाल (Ajit Doval) के साथ मिलकर अधिकारियों की एक बैठक बुलाई जिसमें कई मुद्दों को लेकर चर्चा की गई।

वही विपक्ष लगातार ये कोशिश कर रहा है की किसी तरह जम्मू-कश्मीर में हालात बिगड़े और वह मोदी सरकार पर हमला बोले, आपको बता दें की इस बैठक में अजीत डोभाल ने पांच अगस्त से प्रशासनिक पाबंदियों से गुजर रहे जम्मू कश्मीर की वर्तमान स्थिति के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को बताया।

दरअसल हाल ही में डोभाल ने जम्मू-कश्मीर में 11 दिनों तक रुके थे और इसी बीच उन्होंने शोफियां और अनंतनाग का दौरा किया था और वह की सुरक्षा स्तिथि का व्यक्तिगत रूप से जायजा लिया था, वही अधिकारियों ने यह बताया की कश्मीर घाटी से लौटने के बाद डोभाल की शाह के साथ यह पहली बैठक है।

केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा और अन्य शीर्ष अधिकारी भी इस बैठक में मौजूद थे, जिसमें राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाये गये कदमों की समीक्षा की गई, अधिकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में लगाई गई पाबंदियों से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हुई।

गौरतलब है की अपने जम्मू दौरे के दौरान डोभाल ने जम्मू कश्मीर में सुबह-शाम संबंधित सुरक्षा अधिकारियों से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकें कीं थी और उनमे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मालिक भी शामिल थे।

केंद्र सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद विपक्ष के कुछ नेताओ ने जब इस फैसले का समर्थन किया, जैसे ज्योतिरादित्य सिंधियां और कांग्रेस के एक-दो और नेता थे जिन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले को सही बताया था, लेकिन उसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने ये बयान दिया था की जिसे कांग्रेस का इतिहास नहीं मालूम है वो पहले जाकर कांग्रेस का इतिहास पढ़े।

जिसके बाद ऐसा लगाने लगा है की मोदी सरकार के इस फैसले ने कांग्रेस को दो विभाग में बांट दिया हो, वही एक बात और है की इतने सालों तक इस मुद्दे पर जनता को गुमराह किया गया और ये कहा गया की अगर जम्मू-कश्मीर से ये दोनों धाराए हटा दी जाएगी तो यह भारत का हिस्सा नहीं रहेगा।

अगर हम विधानसभा चुनावों की बात करें तो शायद बीजेपी को उसके इस फैसले का फायदा विधानसभा चुनाव में देखने को जरूर मिलेगा, जबकि कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव में अच्छे परिणाम देखने को नहीं मिले तो विधानसभा चुनाव में तो उससे किसी भी तरह की उम्मीद करना बेकार है।

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