विदेश मंत्री S Jaishankar के मास्टर स्ट्रोक से हिला चीन और पाकिस्तान !

foreign minister S Jaishankar master plan ready for china and pakistan, PM modi also involve
foreign minister S Jaishankar master plan ready for china and pakistan, PM modi also involve

गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को जब से जम्मू-कश्मीर से हटाया है उसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है, उसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) मंत्रालय ने पूरे दलबल के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जर्मनी और खासकर चीन को लेकर रणनीतिक खाका तैयार कर लिया था। भारत को पता था कि इस नए बदलाव से सबसे ज्यादा तिलमिलाहट चीन को होगी।

तभी तो पाकिस्तान आए दिन कुछ न कुछ तरीके से भारत को धमकाने की कोशिश करता रहता है, वही दूसरे तरफ उसे ये डर है की कही भारत उससे POK यानि पाक अधिकृत कश्मीर पर अपना कब्ज़ा न कर ले।

जिसके चलते धारा 370 हटाना वाले मुद्दे को पाकिस्तान ने यूनाइटेड नेशन तक घसीटा लेकिन उसे न ही सुनंने को मिला, जिसके बाद उसने अमेरिका और चीन से भी इस मुद्दे को लेकर मदद मांगी लेकिन इन दोनों देशों ने भी उसका साथ नहीं दिया।

प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने मिलकर बनाई योजना !

प्रधानमंत्री ने खुद कुछ देशों के प्रमुखों से बात करने की पहल कर चुके है, आपको बता दें की विदेश मंत्री एस जयशंकर राजनीति में आने से पहले भारत के विदेश सचिव रह चुके हैं और पुराने कूटनीतिज्ञ भी हैं।

मौजूदा विदेश सचिव विजय गोखले के साथ विदेश मंत्री की समझ और समन्वय दोनों ही काफी अच्छी हैं। यही वजह है कि चीन के साथ दोस्ताना रिश्ते के महत्व को बताने के लिए विदेशमंत्री खुद दौरे पर गए, जहां दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बात हुई थी।

एस जयशंकर ने बताया कि चीन ने उनसे अपनी चिंताओं को साझा किया और अपना पक्ष भी रखा। चीन का रुख समझने के बाद भारत ने अपनी अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को तेजी से धार देना शुरू कर दिया था। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन के साथ तालमेल बनाकर विदेश मंत्री ने खुद संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखने की रणनीति तैयार की।

भारतीय रणनीतिकारों को पाकिस्तान और चीन के अगले कदम की भनक पहले ही लग गई थी। जिसके बाद भारत को इसका पूरा एहसास था कि मानव अधिकार उल्लंघन को आधार बनाकर पाकिस्तान और चीन उसे घेरने की कोशिश कर सकते हैं।

दरअसल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार NSA अजीत डोभाल, गृह सचिव राजीव गाबा, जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम, राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार, राज्य में केंद्र द्वारा नियुक्त मुख्य वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा और राज्य के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह समेत प्रमुख महत्वपूर्ण अधिकारियों ने इसके लिए पूरा खाका तैयार कर लिया था।

पाकिस्तान की हर कोशिश जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की थी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन अंतत: वह अभी तक नाकाम ही रहे है, वैसे इस समय पाकिस्तान के जो हालत है उससे देख कर तो यही लगता है की कुछ दिन में पाकिस्तान में बाहरी निवेश कम होगा ही क्यूंकि अगर उसने आतंकविरोधी घटनाओं पर रोक नहीं लगाई तो उसे और भी बुरे वक़्त से गुजरना पद सकता है।

वही भारत ने पाकिस्तान की कोशिशों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतारा बताया है और भारत की इस कूटनीति को जमकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिल रहा है। भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पाक अधिकृत कश्मीर में जाने, पाकिस्तान के हुक्मरानों द्वारा तनाव पैदा करने की कोशिश और आतंकवाद को शह देने के आरोप लगाए हैं। बताते हैं भारत के आरोप को अमेरिका, फ्रांस, रूस जैसे देशों ने गंभीरता से लेते हुए पाकिस्तान को संयम बरतने के लिए कहा है।

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