चीन दौरे पर भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar, वांग यी से हुई कई मुद्दों पर चर्चा !

आज विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) चीन की तीन दिवसीय अहम यात्रा पर बीजिंग पहुंचे है, जहां उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया अनिश्चितता की स्थिति का सामना कर रही है, तब भारत-चीन संबंधों को स्थिरता का परिचायक होना चाहिए।

एस जयशंकर (S Jaishankar) ने चीनी उपराष्ट्रपति वांग क्विशान से झोंग्ननहाई से उनके आवासीय परिसर में मुलाकात की और बाद में उन्होंने विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक की, जिसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक भी हुई।

राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भरोसेमंद समझे जाने वाले वांग के साथ मुलाकात के दौरान अपनी शुरुआती टिप्पणी में जयशंकर ने कहा, ‘हम दो साल पहले अस्ताना में एक आम सहमति पर पहुंचे थे कि ऐसे समय में जब दुनिया में पहले से अधिक अनिश्चितता है, हमारे संबंध स्थिरता के परिचायक होने चाहिए।’ 

दरअसल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में एस जयशंकर का यह पहले चीन का दौरा है और यह दौरा उस दौरान हो रहा है जब भारत ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35A को हटाया है, वैसे सूत्रों के मुताबिक यह भी कहा जा रहा है की भारत इस मुद्दे को लेकर कुछ बात कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी के बीच हुई शिखर बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं, उस वुहान शिखर सम्मेलन के बाद यहां आ कर आज बहुत खुश हूं, जहां वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर हमारे नेताओं के बीच आम सहमति और बात हुई थी।

एस जयशंकर ने चीन-भारत संबंधों में सकारात्मक और सक्रिय योगदान देने के लिए कई वर्षों तक चीन में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया है, यह विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद चीन की उनकी पहली यात्रा है, मैं उनका स्वागत करता हूं।

आगे चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा की हमें अधिक रक्षा आदान-प्रदान सहित अपने सहयोग तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि हम अधिक व्यावहारिक परिणाम देखने को मिले और हमारा विचार है कि हमें अपने व्यवहारिक, आर्थिक और व्यापार सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता है।

चीन के विदेश मंत्री, बीजिंग में वांग यी से मुलाकात के बाद एस जयशंकर ने बताया की कैलाश मानसरोवर यात्रा के विस्तार के लिए चीन की ओर से आज कुछ सुझाव दिए गए, हम उन पहलुओं की गहराई से सराहना करते हैं और चीन द्वारा दिए गए सुझावों पर भी हम विचार करेंगे।

ऐसा माना जा रहा है कि जयशंकर की चीन की इस यात्रा के दौरान चार सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, वही अधिकारियों को उम्मीद है कि इस साल पहली बार द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर पार करने की उम्मीद है।  

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