कल दोपहर ढाई बजे निगमबोध घाट पर होगा शीला दीक्षित का अंतिम संस्कार !

Tomorrow at 2 pm there will be the funeral of Sheila Dikshit on nigambodhan Ghat
Tomorrow at 2 pm there will be the funeral of Sheila Dikshit on nigambodhan Ghat

आपको बता दें की शीला दीक्षित का अंतिम संस्कार कल दोपहर ढाई बजे दिल्ली के निगमबोध घाट पर होगा, आज शाम 6 बजे से निजामुद्दीन स्थित घर पर अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा जाएगा.

आज दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित का 81 साल में निधन हो गया है, वो पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार चल रही थीं उन्हें आज सुबह ही एस्कॉर्ट्स अस्पताल में भर्ती किया गया थीं उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई.

कुछ ऐसा शिला दीक्षित का राजनितिक सफर

पंजाब के कपूरथला में जन्मी शीला दीक्षित की शादी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से हुई, पंजाबी से ब्राह्मण बनीं शीला दीक्षित ने ससुर के राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में पहली बार शीला दीक्षित कन्नौज से लड़कर संसद तक पहुंची, गांधी परिवार की करीबी होने के नाते उन्हें राजीव गांधी के सरकार में संसदीय कार्य राज्यमंत्री और पीएमओ में मंत्री बनने का मौका मिला.
वही 1998 में सोनिया गांधी के राजनीति में आने बाद शीला दीक्षित को भी दुबारा राजनीति में सक्रिय होने का मौका मिला, सोनिया गांधी ने उन्हें दिल्ली की बांगडोर सौंपी.

जिसके बाद शीला दीक्षित ने पलट कर नहीं देखा और केंद्र में चाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की लेकिन दिल्ली में शीला दीक्षित ही सत्ता में रहीं, शीला दीक्षित ने अपने कार्यकाल में दिल्ली को एक नई पहचान दी, फ्लाईओवर से लेकर मेट्रो, दिल्ली की हरियाली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों को बढ़ावा दिया.

ऐसी कई पहल शीला दीक्षित ने की जिसको आज भी वो गर्व से गिनाती है, लेकिन शीला दीक्षित के दामन पर कॉमनवेल्थ गेम में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों का दाग भी लगा, लेकिन ये शीला दीक्षित का व्यक्तित्व ही था जो वो हर आरोपों के सामने बहादुरी से खड़ी रही.

वह 2014 में केरल की राज्यपाल भी रहीं, लेकिन एक दौर ऐसा आया जब अन्ना आंदोलन और केजरीवाल के भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना नहीं कर पाई और सत्ता गंवा बैठी.

अपनी आत्मकथा में बताई ये बात

अपनी आत्मकथा ‘सिटीजन दिल्ली: माय टाइम्स, माय लाइफ’ में उन्होंने लिखा है कि विनोद यूपी के उन्नाव के कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार से आते थे. उनके ससुर जिन्हें लोग दादाजी कहते थे, ने शीला दीक्षित से कहा था कि, शादी के लिए उन्हें दो हफ्ते, दो महीने या दो साल तक इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि विनोद की माता जी को अंतरजातीय विवाह के लिए मनाना था, 11 जुलाई, 1962 को शीला दीक्षित का विवाह हुआ था.

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