धोनी की कुछ ऐतिहासिक पारियां

Some of the historic innings by Mahendra singh dhoni

 नाबाद 72, बनाम पाकिस्तान, लाहौर, 2006

2005/06 में भारत के पाकिस्तान दौरा में महेन्द्र सिंह धोनी को एक बेहतरीन बल्लेबाज और एक सफल चेज़र के रूप में उभर के आए। लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले जा रहे मैच में भारत 289 रनो का पीछा करते हुए, भारत 190  रनो पर अपने 5 विकेट गवा चुका था, अब मैच का सारा दारोमदार धोनी और युवराज के कंधों पर था।

72, vs Pakistan, Lahore, 2006

धोनी ने उस मैच ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और सिर्फ 35 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। दोनों के बीच एक मेधावी साझेदारी  के चलते भारत ने 14 गेंद  पहले ही मैच को जीत लिया धोनी  ने 46 गेंदों में 72 रन बनाए जिसमें 13 चौके शामिल थे। इस मैच कोप्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है, जहां पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने शानदार बल्लेबाजी के लिए धोनी की प्रशंसा की और उन्हें अपने प्रसिद्ध लंबे बाल रखने की सलाह भी दी।

224 बनाम ऑस्ट्रेलिया, चेन्नई, 2013

जब भी टीम कोई परेशानी में हो, धोनी ने हमेसा आकर टीम की अगुवाई की है और ताकतवर ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ चेन्नई टेस्ट मैच इस बात का एक और उदाहरण है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत  सामने 380  का विशालकाय लक्ष्य रखा।

224 vs Australia, Chennai, 2013

भारत 196/4 पर था जब धोनी मैदान में आये पहले विराट कोहली के साथ 128 रन की साझेदारी और फिर भुवनेश्वर कुमार के साथ 140 रनों की शानदार साझेदारी खेली। दूसरे छोर पर विकेट गिरने के बावजूद धोनी क्रीज़ पर डटे रहे, उन्होंने 265 गेंदों पर 224 रन बनाए जिसमें 24 चौके और 6 छक्के शामिल थे। यह धोनी की मैच विनिंग पारी थी और भारत ने 8 विकेट से मैच को जीता।

यह धोनी का सर्वोच्च टेस्ट स्कोर है और भारतीय विकेटकीपर का पहला दोहरा शतक।

नाबाद 64, बनाम किंग्स इलेवन पंजाब, विजाग, 2017

2017 के आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ खेली गयी पारी ने पुराने धोनी की यादे ताजा की, धोनी बल्लेबाजी करने आए जब पुणे को 51 गेंदों पर 95 रनों की जरूरत थी। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने का मतलब था कि पुणे को कभी भी गेंदबाजों पर हावी होने का मौका नहीं मिला।

Not out 64, vs Kings XI Punjab, Vizag, 2017

एक्सर पटेल के अंतिम ओवर में पुणे की ओर से छह गेंदों पर 23 रन की जरूरत थी। धोनी स्ट्राइक पर थे, आखिरी दो गेंदों पर दो छक्कों ने पुणे को ऐतिहासिक जीत दिलाई और धोनी की कभी न खत्म होने वाली लोककथाओं में एक और अध्याय जोड़ दिया।

 नाबाद 44, बनाम ऑस्ट्रेलिया, एडिलेड, 2012

यह एक पारी थी जिसमें एमएस धोनी सुरेश रैना के साथ अपनी पारी की शुरुआत में संघर्ष कर रहे थे, भारत 270 रनों का पीछा कर रहा था और गौतम गंभीर ने भारत को एक ठोस शुरुआत दी।

Unbeaten 44, vs Australia, Adelaide, 2012

रैना के आउट होने के बाद, धौनी ने फिर एक बार भारत  की कमान संभाली। क्लिंट मैके के अंतिम ओवर में भारत को 13 रनो की दरकार थी। ओवर की पहली दो गेंदों में अश्विन ने 1 रन बनाया,और अब भारत को जीत के लिए 4 गेंदों में 12 रनो की जरूरत थी। अब धोनी स्ट्राइक पर थे, उन्होंने अगली ही गेंद पर एक जोरदार छक्का मारा और अब 3 गेंदों में 6 रन बनाने थे। अगली नो बॉल के चलते अब भारत को जीत के लिए मात्र 3 रनो की दरकार थी और धोनी ने वो आसानी से बना दिए। धोनी ने एक बार फिर एक बढ़िया रन चेज किया और भारत को हारा हुआ मैच जीता दिया।

नाबाद 113, बनाम पाकिस्तान, चेन्नई, 2012

श्रृंखला के पहले मैच में, भारत को चेन्नई में बल्लेबाजी करने के लिए कहा गया। धोनी के क्रीज पर आते समय भारत ने महज 29 रनो पर अपने 5 विकेट गवा  चूका था। फिर धोनी ने आकर एक परिपक्व पारी खेली, 125 गेंदों में 113 रन की नाबाद पारी में सात चौके और तीन छक्के लगे। सुरेश रैना के साथ 75 रन की साझेदारी और फिर रवि अश्विन के साथ 125 रन की साझेदारी ने भारत को कुल 227-6 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

Not out 113, vs Pakistan, Chennai, 2012

वो मैच भारत चार विकेट से हार तो गया, लेकिन धोनी ने दम पर पूरी टीम को संभाले रखा और ये साबित कर दिया कि वो  प्लेयर हैं।

नाबाद 45, बनाम श्रीलंका,पोर्ट ऑफ स्पेन, 2013

क्वीन पार्क ओवल में श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में, भारत 202 रनों का पीछा कर रहा था और 32 ओवर में 139 रन बनाकर आप[ने 3 विकेट खो चूका था। श्रीलंका के गेंदबाज रंगना हेराथ ने भारत के 4 विकेट लिए और अब भारत को 2 ओवर में 17 रन की दरकार थी, भारत की और से धोनी के साथ क्रीज पर अंतिम भारतीय बल्लेबाज ईशांत शर्मा थे।

Not out 45, vs Sri Lanka, Port of Spain, 2013

भारत के लिए सौभाग्य की बात ये थी की, ईशांत शर्मा ने अपना विकेट नहीं गवाया और अब  भारत को आखिरी छह गेंदों में 15 रनों की जरूरत थी। अंतिम ओवर  श्रीलंकाई गेंदबाज शमिंदा एरंगा करने आए, धोनी पहली गेंद पर चूक गए और फिर हमेशा की तरह धमाके के साथ खेल खत्म किया।

शमिंदा एरंगा की दूसरी गेंद पर धोनी ने छक्का और अगली दो गेंदों पर लगातार दो चोक्के मारे। एक बार फिर भारत को को एक ऐतिहासिक मैच जीताया और एक और ट्रॉफी भारत के  नाम की

नाबाद 183,बनाम श्रीलंका, जयपुर, 2005

श्रीलंका के खिलाफ धोनी की यह पारी, जिसने धोनी को क्रिकेट के एक अलग मंच पर पहुंचाया। उन्हें पहले से ही एक खतरनाक बल्लेबाज माना जाता था, लेकिन सवाई मानसिंह स्टेडियम में इस पारी ने इतिहास रचा। 299 रनों का पीछा करते हुए, भारत की पारी की शुरुआत खराब तरीके से हुई और सचिन ने पहले ही ओवर में अपनी विकेट जा दी। गांगुली और टीम प्रबंधन द्वारा एक आश्चर्यजनक निर्णय में, एमएस धोनी को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए भेजा गया था।

Not out 183, vs Sri Lanka, Jaipur, 2005

और फिर क्या था, धोनी ने तीन नंबर पर एक एक लाजवाब पारी खेली।उन्होंने 145 गेंदों पर 183 रन बनाए और भारत को चार ओवर शेष रहते मैच जीता दिया। उनकी पारी में 15 चौके और 11 विशाल छक्के शामिल थे।

धोनी ने इस मैच के दौरान एक इतिहास रचा, उन्होंने बतौर विकेटकीपर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने और विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना दी।

नाबाद 54, बनाम किंग्स इलेवन पंजाब, धर्मशाला, 2010

Not out 54, vs. Kings XI Punjab, Dharamsala, 2010

यह मैच उन दुर्लभ अवसरों में से एक था, जहां एमएस धोनी ने अपने शांत स्वाभाव को छोड़कर मैच जीतने के बाद जश्न मनाया। धर्मशाला में सुपर किंग्स के लिए करो या मरो के मैच में,पंजाब की टीम ने चेन्नई को 192 का कठिन लक्ष्य दिया। धोनी क्रीज़ पर तब उतरे जब चेन्नई को 10 ओवरों में 104 रनों की जरूरत थी। धोनी उस दिन एक उद्देश्य के साथ बल्लेबाजी कर रहे थे, जब उन्होंने 29 गेंदों में 54 रन बनाए जिसमें पांच चौके और दो छक्के शामिल थे। चेन्नई को आखिरी ओवर में 16 रनो की जरुरत थी, पंजाब की ओर से इरफान पठान आखिरी ओवर डालने आये और धोनी ने 2 गेंद पहले ही मैच को ख़त्म किया और चेन्नई को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

नाबाद 91, बनाम श्रीलंका, वानखेड़े स्टेडियम, 2011

यह विश्व कप 2011 का अंतिम मुकाबला था और भारत को अपना दूसरा विश्व कप जीतने के लिए 275 की जरूरत थी। पांचवें नंबर पर, युवराज सिंह बल्लेबाजी के लिए आने वाले थे लेकिन धोनी ने खुद को बढ़ावा देने का फैसला किया और मुथैया मुरलीधरन और सूरज रणदीव की स्पिन जोड़ी को अच्छी तरह से संभाला और रन गति को बनाये रखा। यह मैच धोनी के छक्के से जीता गया और और भारत 2011 विश्व कप का विजेता बना।

unbeaten 91, vs Sri Lanka, Wankhede Stadium, 2011

धोनी की यह पारी, भारतीय क्रिकेट फैन्स की यादों में हमेशा के लिए रह जाएगी और वह छक्का भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाएगा। सुनील गावस्कर ने उस महत्वपूर्ण पारी के बारे में कहा, “मरने से पहले जो मैं आखिरी चीज़ देखना चाहूंगा, वो धोनी द्वारा 2011 विश्व कप के फाइनल में मारा गया छक्का होगा।

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