पीयूष गोयल की सफाई : रेलवे के निजीकरण करने का सरकार का कोई इरादा नहीं !

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तेजस ट्रेन को प्राइवेट हाथो में देने के निर्णय के बाद से ही सरकार विपक्ष के निशाने पर है ! दरअसल वित्त मंत्री निर्मला जी ने बजट में बोला था की सरकार धीरे धीरे सुविधाओ को बढ़ाने के लिए निजीकरण का रास्ता अपना सकती है लेकिन अब सरकार ने विपक्ष के हमलो पर अपनी सफाई पेश की है !

 रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- रेलवे का निजीकरण नहीं किया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल ही नहीं उठता है, आगे गोयल ने कहा- सच्चाई यह है कि यदि हम रेलवे की सुविधाओं में सुधार चाहते हैं तो उसके लिए पूंजी की आवश्यकता है.

हमें इसकी पूंजी क्षमता बढ़ाना होगी और पीपीपी मॉडल को अनेक प्रोजेक्ट्स में लागू किया जाएगा, कुछ यूनिट्स जरूर कॉर्पोरेट के हवाले की जाएंगी मगर कांग्रेस इस पर घड़ियाली आंसू बहा रही है क्यूंकि यह तो उनके समय से शुरू हो गया था।

गोयल ने आगे बताया की सुविधाएं बढ़ाने के लिए हमें निवेश की जरूरत होगी और हम निर्णय ले चुके हैं कि कुछ प्रोजेक्ट्स में पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप को शामिल करेंगे वही कुछ यूनिट्स का कॉर्पोरेटाइजेशन भी होगा और राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए हम कुछ नए ट्रैक्स लाने के लिए नए प्रोजेक्ट्स शुरू करेंगे वही इसके लिए हम निवेश आमंत्रित करेंगे.

गोयल ने कहा- पहले के समय में रेलवे बजट का इस्तेमाल पूरी तरह से राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता था और  यह ऐसा बजट था, जो न सिर्फ राजनीतिक कारणों से बनता था, बल्कि उसका उद्देश्य भी देश और सांसदों को गुमराह करना होता था. सैकड़ों ट्रैनों और ट्रैक्स की घोषणा सिर्फ चुनाव जीतने के लिए कर दी जाती थी..

गोयल के मुताबिक- प्रधानमंत्री मोदी ने अलग रेलवे बजट को खत्म किया और उन्होंने रेलवे को नया विजन और मिशन दिया, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा की यूपीए के शासनकाल में रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री में एक भी कोच का उत्पादन नहीं हुआ मगर भाजपा के सत्ता में आने के बाद अगस्त 2014 में पहला कोच बना !

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