मोदी की शिव साधना का महबूबा मुफ़्ती ने उड़ाया मजाक : फ़िल्मी गाने से की साधना की तुलना !

हमारे हिन्दू धर्म में शिव को संहार का देव माना गया है बाकी ब्रह्मा को सृजन का और विष्णु को पालन करने का दायित्व दिया गया है और इस पृथ्वी पर भी भगवान विष्णु ही अवतार लेते है जिनमे उनके 10 अवतार प्रमुख है ! 4 वेद 6 शास्त्र 18 पुराण और 22 उप पुराण में शायद ही कोई ऐसा ग्रन्थ हो जिसमे शिव का वर्णन ना हो, शिव के बारे में लगभग हर शास्त्र में वर्णन है क्यूंकि शिव अनंत है, शिव शास्वत सत्य है !

महापंडित रावण ने अपने कालजयी रचना ” शिव तांडव ” में लिखा है की ये जो भी प्रकृति हम देख रहे है जिसमे झरने, तालाब,पहाड़ यानी वो सब जो हमें दिख रहा है जो दृश्य है उसकी रचना महादेव ने माता पार्वती के वक्ष स्थल पर चित्रकारी करके की है और जो मनुष्य सिर्फ इस मोह माया में ही उलझ कर रह जाता है वो कभी महादेव को नहीं समझ सकता और जीवन के वैराग्य को प्राप्त नहीं कर सकता.

इस देश ने लगभग 1200 साल की गुलामी का कालखंड देखा है और हर दौर में हम सनातनी लोगो को अपनी पारम्परिक जीवन शैली से दूर करने का भरसक प्रयास हुआ है ! ये एक धारण बना दी गयी है की हिन्दू एक दोयम दर्जे का नागरिक है और उसे अपनी सनातनी संभ्यता पर गर्व नहीं शर्म करनी चाहिए, कितनी चतुराई से हमारे ऋषि मुनियों द्वारा रचित वैज्ञानिक सूत्रों को अंध विश्वास बना दिया गया.. एक दुसरे धर्म की महिला अगर 1 महीने तक बिना पानी पिए इबादत करे तो वो महान लेकिन एक हिन्दू महिला पति की आयु के लिए 1 दिन प्यासी रह जाए तो वो पाखंड !

कल एक अजीब घटना इस देश में हुई ! देश के वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी अपने लम्बे थका देने वाले चुनाव प्रचार के बाद शिव की शरण में गये, जैसी ही वो केदारनाथ पहुचे मीडिया और देश के एक बहुत बड़े वर्ग ने उन्हें आड़े हाथ ले लिया, कोई कहने लगा की वाराणसी में चुनाव है तो आप हिन्दुओ को सन्देश दे रहे है और कोई कहने लगा की देखो देखो प्रधानमंत्री को क्या ये शोभा देता है ? एक ही झटके में वो आदमी साम्प्रदायिक हो गया, क्यों ?? क्यूंकि वो मस्जिद नहीं गया ! और क्या वो मस्जिद जाता तो सेक्युलर हो जाता ?? क्या एक मनुष्य अपने आराध्य की शरण में नहीं जा सकता ? अब शिव की साधना करने से पहले पूछना होगा की अरे भाई में जाऊ या नहीं जाऊ ??

हद तो तब हो गयी जब ये खबर आई की मोदी जी एक गुफा में 20 घन्टे तक साधना करेगे ! अब हकीकत ये है की हमारी सनातन परम्परा में साधना तो कोई बड़ी बात है ही नहीं ? हमारी माताए बहने रोज़ साधना करती है ! मंदिर में साधू संतो के साथ घंटो ध्यान में लोग जाते है ! शिव की तो मनाया ही साधना से जाता है, हमारे यहाँ व्रत, उपवास त्यौहार ये सब साधना के ही तो रूप है, एक लड़की उपवास करती है और दिन भर प्यासी रहती है क्या ये साधना नहीं ?

कोई कृष्ण की दीवानी अपने कृष्ण को पाने के लिए मथुरा वृन्दावन में भटकती है क्या वो प्रेम नहीं ? हिन्दू धर्म में समस्त जगत से प्रेम करना सिखाया गया है, लोगो के कल्याण के लिए हम साधना करते है लेकिन देश का प्रधानमंत्री अगर ऐसा करे तो वो लिबरल लोगो को पसंद नहीं आया ! गीता में मेरे कृष्ण कहते है की हे अर्जुन ! स्व धर्मे निर्धन सुखम, परधर्मो भयावहे..इसका अर्थ यह है की मनुष्य स्व धर्म में ही जीवन जीए चाहे वो निर्धन ही क्यों ना हो क्यूंकि दुसरे धर्म में जीना भयावह है.

कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती को मोदी की शिव साधना मजाक लगती है, क्यूंकि हिन्दू सहिष्णु है ! क्या मेहबूबा मुफ़्ती किसी मुस्लिम के नमाज़ पढ़ते हुए दृश्य की तुलना एक फ़िल्मी गाने से कर सकती है ?? मरे महादेव की साधना क्या फ़िल्मी है ?? क्या देश के pm को ये भी अधिकार नहीं ?? मुफ़्ती अमिताभ जी की फिल्म ” सिलसिला ” की एक पंक्ति के साथ ट्वीट करती है की मैं और मेरी तन्हाई ! अक्सर ये बाते करती है ! ANI का भी वो मजाक बना रही है क्योंकि उन्होंने फोटो ट्वीट की !

अक्सर हम बात करते है धर्म निरपेक्ष होने की लेकिन ये एक तरफा क्यों ? ये हिन्दुओ का मजाक बनाने पर ही जीवित रहेगी ? कोई लड़की मक्का मदीना जाए तो पवित्र हो जाए लेकिन कोई लड़की मथुरा जाए तो साम्प्रदायिक हो जाए ? या समस्या अब ये है की हिन्दू बोलने लगा है ! मेरा मानना है की इस देश के बहुत बड़े वर्ग को अब ये समझाना होगा की अब बहुत हुआ..वो दिन गए जब वोट बैंक की राजनीती के चलते हिन्दुओ को आतंकी और पाखंडी बताकर घ्रणा का पात्र बना दिया जाता था लेकिन अब सम्मान करना होगा, धर्म का भी और सभ्यता का भी..

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