मेजर चित्रेश जिसने परिवार नहीं भारत माता को आगे रखा

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आज देहरादून मे गंगा किनारे मेजर चित्रेश का अंतिम संस्कार हुआ है, वो 16 feb को नौशेरा IED BOMB को निष्क्रिय करते हुए घायल हो गए थे, बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

28 फरवरी को वो इसलिए आने वाले थे क्योंकि 7 मार्च को उनकी शादी तय थी. उन्होंने मां से फोन पर कहा था कि आकर मैं अपनी पसंद की साड़ी दिलाऊंगा. वही मेरी शादी में पहनना. मगर वो नहीं आए.

चित्रेश जम्मू कश्मीर के नौशेरा में पोस्टेड थे. 16 फरवरी की सुबह नौशेरा के बॉर्डर पर कई माइंस मिलीं. आतंकियों ने बिछाई थीं. चित्रेश अपनी बम डिस्पोजल टीम के साथ मौके पर पहुंचे. एक माइन डिफ्यूज कर दी.

उसके बाद वो दूसरी माइंस निष्क्रिय कर ही रहे थे की माइन एक्टिवेट हो गई और विस्फोट हो गया और 31 साल के चित्रेश घायल हो गए , बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया पर उन्हें बचाया नहीं जा सका और चित्रेश शहीद हो गए.

जब ये हादसा हुआ उस वक़्त चित्रेश के पिता एसएस बिष्ट बेटे की शादी के कार्ड बांटने में व्यस्त थे. पूरा परिवार शादी की तैयारियों में लगा था मगर 16 फरवरी की शाम ये ख़ुशी का माहौल मातम में बदल गया.

18 फरवरी को चित्रेश का पार्थिव शरीर जब देहरादून की नेहरु कॉलोनी स्थित उनके घर पहुंचा तो हर तरफ लोग थे. हजारों लोग.

सड़क पटी पड़ी थी और चित्रेश अमर रहें. भारत माता की जय. जब तक सूरज चांद रहेगा, चित्रेश तेरा नाम रहेगा जैसे  नारे गूंज रहे थे..लोग देश के लाल पर गमजदा थे लेकिन अपने सपूत पर गर्व कर रहे थे..

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