क्या फिर PM बन पायेगे मोदी जी : पढ़िए जन्म पत्री का ज्योतिषीय विश्लेषण

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प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने आज से 5 साल पहले तमाम विरोधो को पार करते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया था और अब कुछ ही महीनो में देश में आम चुनाव है और तमाम ओपिनियन पोल कह रहे है की बीजेपी को बहुमत हासिल नहीं होगा और मोदी जी को दोबारा PM बनने में कठनाई आ सकती है ..

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आज ऐसे में हम उनकी कुंडली से यह समझने का प्रयास करेगे की इस वक़्त उनके सितारे क्या कह रहे है और क्या ग्रह नक्षत्रो की चाल एक बार फिर उन्हें प्रधानमन्त्री बनाएगी ??

लग्न कुंडली का स्वरुप –

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प्रधानमन्त्री जी का जन्म 17 दिसम्बर 1950 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर हुआ था, जन्म कालीन नक्षत्र था अनुराधा और 19 डिग्री पर वृश्चिक लग्न है..

कुंडली में बलवान ग्रहों की स्तिथि –

मोदी जी की कुंडली में ग्रहों के सेनापति मंगल चन्द्र के साथ लक्ष्मी योग का निर्माण कर रहे है, मंगल 6टे भाव का स्वामी है और चुकी लग्न में बैठा है इसलिए मोदी जी के अनेक शत्रु बन जाते है, लेकिन लग्नेश का लग्न में ही बैठकर भाग्य स्थान के स्वामी के साथ नीच भंग राजयोग { इसकी चर्चा हम कभी भविष्य में करेगे } बनाना यह कुंडली का सबसे बलवान पक्ष है.

भाग्य स्थान का स्वामी अगर 6टे भाव के स्वामी के बलवान होकर बैठे तो वह शत्रु हन्ता योग होता है और मोदी जी की कुंडली में यह योग है, जो इनसे दुश्मनी लेगा वह स्वत ही नष्ट हो जाएगा.

मंगल के कारण इनकी कुंडली में पंच महापुरुषों में से एक रुचक योग भी बन रहा है जिसके कारण इनके पास अद्भुत शौर्य है और ऐसा इंसान निर्णय लेने से पीछे नहीं हटता, नोट बंदी और सर्जिकल स्ट्राइक इसके जीते जागते उदाहरन है.

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आगे नजर में डाले तो लाभ स्थान में उच्च के बुद्ध से बन रहा बुद्ध आदित्य योग इन्हें चर्चा में बनाये रखता है, ऐसा इंसान जहाँ भी जाएगा मित्र बनाएगा, वह अपनी छवि और सोच से दुसरो को प्रभवित करता है, बुद्ध के बलवान होने के कारण हो इनके पास देश को लेकर एक विज़न है.

प्रधानमन्त्री का व्यक्तित्व –

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सन्यास के कारक शनि केंद्र के स्वामी होकर केंद्र में ही विराजमान है जिसके कारण केंद्र आधिपत्य योग का निर्माण हो रहा है, यहाँ समझने वाली बात यह है की मोक्ष कारक भाव यानी 12 वे भाव का स्वामी शुक्र शनि के साथ है जिस पर गुरु की दृष्टि है जो खुद केंद्र में बैठा है, इस दुर्लभ योग के कारण ही इन्होने घर छोड़ा है.

राजनीति में शनि प्रजा का कारक है और उस पर शुभ ग्रह गुरु का प्रभाव है जिसके कारण प्रजा में इनकी छवि एक इमानदार नेता की बनी हुई है, व्यापार का कारक बुद्ध केतु के साथ है और ये दोनों सूर्य के नक्षत्र में है और यही कारण है की इनकी विदेश यात्राओ से ये निवेश लाने में सफल हो पाते है और गुजरात में इन्होने यही करके दिखाया था.

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सप्तम भाव यानी संघटन का भाव, स्वामी पाप ग्रह के साथ वही उस स्थान पर मंगल की सप्तम दृष्टि जिसके कारण इनके अपनी ही सहयोगी पार्टियों के नेताओ से मतभेद होते रहते है.

PM मोदी का मुख्यमंत्री काल –

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मोदी जी पहली बार 2001 में शुक्र और बुद्ध के काल में मुख्यमंत्री बने, शुक्र  शनि और गुरु के प्रभाव में है वही उच्च का बुद्ध केतु और राहू के प्रभाव में है जिसके कारण विवाद भी हुए, वही दिसम्बर 2002 से दिसम्बर 2007 तक पूर्णकालीन मुख्यमंत्री ये रहे, कारण था गुरु का अंतर ..

दिसम्बर 2007 से 12 तक तीसरी बार मुख्यमंत्री बने तब सूर्य में शनि का अंतर था, शनि के उपर केंद्र में बैठे राजयोग बना रहे गुरु की दृष्टि के कारण कोई हानि नहीं हुई लेकिन सूर्य पर राहू का प्रभाव और न्य्यापालिका के कारक शनि का दशम पर बैठना, जिसके कारण अदालतों के चक्कर लगे, छवि विवादित रही लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ.

जैसे ही भाग्य स्थान के स्वामी चंद्रमा की महादशा आई इनकी लोकप्रिय छवि देश विदेश में असर छोड़ने लगी, परम राजयोग कारक गुरु की अन्तर्दशा में इन्होने अपनी पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलवाया, महादशा का स्वामी चंद्रमा नीच भंग राजयोग बना रहा है जिसके कारण इनको कोई भी चुनौती देने में सक्षम नहीं हुआ और रुचक योग बना रहे मंगल के अंतर में इन्होने प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली.

वर्तमान में ग्रहों का गोचर –

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वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह गुरु का गोचर लग्न में जो इन्हें शुभता प्रदान करेगा, शनि जिसका गोचर दुसरे भाव में है वो भी अब उदय हो गया है, शनि की साढे साती का अब ये अंतिम चरण है, मार्च से राहू का गोचर आठवे भाव में होगा जिसके कारण इनके साथ कोई दुर्घटना होने के योग बनते है वही वाणी भाव में गोचर करेगा केतु जो इन्हें विवाद में डाल सकता है.

वही महादशा की बात करे तो वर्तमान में चन्द्र में शुक्र की अन्तर्दशा है जो की किसी भी लिहाज से बेकार तो नहीं कहीं जा सकती है..

शुक्र केंद्र में और वो भी बलवान शनि के साथ जिस पर गुरु का प्रभाव है वही 27 मार्च से जुलाई 19 तक चन्द्र में शुक्र में खुद शनि का अंतर रहेगा जो की केन्द्रधिपत्य राजयोग बना रहा है..

गोचर में भी गुरु लग्न में होंगे और शनि उनसे आगे रहेगा ऐसे में मोदी जी दोबारा PM नहीं बनेगे ऐसा शायद ही हो..

 

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