प्रियंका गांधी की कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण : क्या राजनीति में सफल होगी ?

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याद करिए 10 मार्च 2017 का वो दिन जब कांग्रेस पार्टी उत्तर पदेश के विधानसभा चुनावो में सिर्फ 7 सीट जीत पायी थी तब दिल्ली कांग्रेस के दफ्तर के बाहर कांग्रेस कार्यकताओ का एक झुण्ड नारे लगा रहा था की ” प्रियंका गांधी लाओ, कांग्रेस बचाओ ” और उन तमाम कार्यकर्ताओ की भावनाओ को ध्यान में रखते हुए आखिरकार एक लम्बे इंतज़ार के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की बेटी प्रियंका गांधी देश की राजनीति में एंट्री मार रही है.

आज हम प्रियंका की जन्म पत्री का ज्योतिषीय विश्लेषण करते हुए यह समझने का प्रयास करते है की आगे उनका राजनीति में भविष्य कैसा रहेगा ?

प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर नई दिल्ली में हुआ. मिथुन लग्न की कुंडली है. राशि वृश्चिक है, बुद्ध के प्रभाव से जातक गुणी वक्ता और बुद्धिमान होता है वही नीच का चंद्रमा है लेकिन उसका स्वामी मंगल केंद्र में बैठकर राजयोग बना रहा है.

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इस कुंडली में राजनीति के कारक ग्रह गुरु केंद्र में है, देव गुरु बृहस्पति ग्रहों के राजा सूर्य के साथ अपने ही भाव में लग्नेश बुद्ध के साथ केन्द्रधिपत्य राजयोग का निर्माण कर रहे है जिसके कारण प्रियंका गांधी के प्रति कांग्रेस कार्यकर्ताओ का एक नेसर्गिक लगाव है.

शनि की अगर हम बात करे तो शनि mithun लग्न की कुंडली में भाग्येश होकर योगकारक होता है और इस कुंडली में कुम्भ राशि में शनि के मित्र शुक्र बैठे है लेकिन शनि देव खुद 12 वे भाव में विराजमान है और यही कारण है की जीवन के 32 वे वर्ष में नहीं बल्कि जीवन के 47 वे वर्ष में इनका राजनीति में आना हुआ है.

इस वक़्त प्रियंका जी की शनि की साढ़े साती चल रही है और इसी समय में इनके जीवन ने राजनीति के तौर पर बहुत बड़ा बदलाव आया है वही देश के वर्तमान प्रधानमन्त्री मोदी जी भी शनि की साढे साती के प्रभाव में ही चल रहे है.

वही अब बात करे महादशा की तो अभी मार्च 2020 तक शुक्र की दशा में शनि का अंतर है और mithun लग्न के लिए शुक्र और शनि दोनों में पंचमेश और भाग्येश का सम्बन्ध होता है और पंचमेश शुक्र का भाग्य स्थान में बैठना एक अद्भुत राजयोग है..

याद करिए उत्तर प्रदेश के चुनाव ने भी इनको लाने की बात हुई थी क्यूंकि जनवरी 17 से जैसे ही शुक्र की दशा आई उसने कुम्भ राशी के स्वामी शनि और नक्षत्र स्वामी मंगल के अनुसार फल देना शुरू कर दिया. उस वक़्त देव गुरु गोचर में 12 वे थे इसलिए इनकी राजनीति में एंट्री नहीं हुई थी लेकिन वर्तमान में देव गुरु ब्रहस्पति का गोचर लग्न से ही हो रहा है इसलिए इनका इस वर्ष राजनीति में उदय हुआ है.

अब 13 फ़रवरी से 20 अप्रैल तक मंगल का सूक्ष्म है जो की सेनापति है और केंद्र में बलवान होकर बैठा है और ऐसे में यह समय प्रियंका गांधी के लिए एक तरह से स्वर्णिम कहा जा सकता है और निश्चित तौर पर कांग्रेस को एक बार फिर स्थापित करने में उनकी भूमिका इंदिरा गाँधी जैसे ना सही लेकिन उनसे कम भी नहीं रहने वाली है.

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