14 नहीं बल्कि 15 जनवरी को है मकर संक्रांति : जानिये स्नान और दान का शुभ मुहूर्त !

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हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है, मकर संक्रांति के दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी मकर संक्रांति 14 के बजाय 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

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पौष माह में सूर्य के धनु से मकर राशि में जाने पर यह पर्व मनाते हैं। अमूमन हर साल 14 जनवरी को सूर्य मकर में प्रवेश करता है, लेकिन इस साल यह स्थिति सूर्योदय मान के साथ 15 जनवरी को होगी.

मकर संक्रांति का काल –

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इस बार 14 जनवरी की शाम 7 बजकर 52 मिनट पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा इसलिए इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पुण्यकाल नहीं होगा वही 15 जनवरी को सूर्योदय मकर राशि के साथ होगा जिससे की संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को ही मान्य होगा और इस दिन सुबह 6:42 से 9:25 बजे तक रहेगा सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा जिसका अर्थ यह है की इस दौरान पूजा-दान का विशेष फल आपको प्राप्त होने वाला है.

क्‍यों मनाई जाती है मकर संक्रांति ? 

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सूर्य देव जब धनु राशि से मकर पर पहुंचते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है और इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है.उत्तरायण देवताओं का दिन माना जाता है और सूर्य की स्थिति के अनुसार वर्ष के आधे भाग को अयन कहते हैं। अयन दो होते हैं-. उत्तरायण और दक्षिणायन। सूर्य के उत्तर दिशा में अयन अर्थात् गमन को उत्तरायण कहा जाता है. उत्तरायण में मृत्यु होने से मोक्ष प्राप्ति की संभावना रहती है, महाभारत में गंगा पुत्र भीष्म ने भी इसी दिन अपनी इच्छा से प्राण त्याग दिए थे.

मकर संक्रांं‍ति की पूजा व‍िध‍ि-

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भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायण के दिन मनुष्य को व्रत करना चाहिए और अगर संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए वही इस द‍िन तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक है और इसके बाद भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.

मकर संक्रांं‍ति पर दान –

मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में स्‍नान और दान-पुण्य करने का व‍िशेष महत्‍व है और इस द‍िन ख‍िचड़ी का भोग लगाया जाता है, उत्तर भारत में मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का प्रसाद भी बांटा जाता है, सुहागिने अपने से बड़ी उम्र की महिलाओ को भेट देती है वही कई जगहोंं पर पतंगें उड़ाने की भी परंपरा है।

 

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