ऐतिहासिक दिन : लोकसभा में पास हुआ सवर्ण आरक्षण संसोधन बिल !

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आज मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण गरीबों के लिए लाए गए 10 फीसदी आरक्षण वाला बिल लंबी चर्चा और उसके बाद हुई वोटिंग के बाद पास हो गया है, लोकसभा में कुल 323 लोगों ने बिल के समर्थन में वोट दिया, जबकि तीन सदस्यों ने इसके विरोध में वोटिंग की.

भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाए। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 लोकसभा में पेश हुआ और इस विधेयक के जरिए संविधान की धारा 15 व 16 में बदलाव किया जाएगा।

आज मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने कहा कि जो लोग ऊंची जाति में होने के बाद भी अनुसूचित जाति जन जाति से भी बुरी स्थिति में हैं उन्हें इस आरक्षण के जरिए रोजगार और शैक्षिक स्तर पर समानता का माहौल मिलेगा.

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वही असदुद्दीन ओवैसी ने सदन में इस बिल का विरोध किया. उन्होंने इसे डॉ. भीमराव अंबेडकर की तौहीन करार दिया ओवैसी ने सवाल किया कि क्या सवर्ण और जागीरदारों ने छुआछूत जैसी सामाजिक असमानता को झेला है ?

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वही रामविलास पवासन ने सामान्य श्रेणी के आरक्षण को लेकर तीन मांगें की हैं. उन्होंने कहा कि 60 प्रतिशत को 9 वीं अनुसूची में डाल दिया जाएगा. जिससे इसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी. उन्होंने निजी क्षेत्र और भारतीय न्यायिक सेवा में भी 60 प्रतिशत आरक्षण की मांग की.

इससे पहले शाम को सदन में संबोधन के दौरान जेटली ने कहा कि यह आरक्षण बिल सबका साथ, सबका विकास को सुनिश्चित करता है. उन्होंने इसे समानता के लिए उठाया गया कदम बताया है. जेटली ने कहा कि यह बिल समाज का उत्थान करेगा.

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