जानकारी: दिल्ली में प्रदूषण से बचने के सभी तरीके

पिछले कुछ सालों से दिल्ली और कुछ अन्य बड़े शहरों में प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान से कई आगे पहुंच चुका है. हर साल ठंड शुरू होने से पहले ही प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुँच चूका है. सुबह सवेरे या दिन में अगर बही आपको धुंध दिखाई डे तो उसे सर्दी की शुरुवात वाला कोहरा मत समझिएगा दरअसल वो स्मॉग होगा जिसमे कई प्रदूषण फैलाने वाले छोटे-छोटे कण होते हैं जिनकी वजह से दम घुटने जैसी और आंखों में जलन जैसी सम्स्याएं होती हैं. फॉग और स्मोक के इस खतरनाक मिश्रण को स्मॉग कहा जाता है. यह प्रदूषित स्मॉग सड़कों पर चल रही लाखों गाड़ियों से निकलने वाले धुंए से बनता है. हर साल यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इसीलिए इससे बचने के तरीकों पर आपको ध्यान देना जरूरी है. यह जहरीला स्मॉग आपकी और आपके परिवार की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. हम आपको बता रहे हैं स्मॉग से बचने के कुछ तरीके और इससे होने वाली खतरनाक बीमारियों के बारे में.

सांस लेने में परेशानी

स्मॉग सबसे ज्यादा परेशान उन लोगों को करता है जिन्हें सांस की बीमारी यानी अस्थमा आदि होता है. ऐसे लोगों को बाहर निकलते ही दम घुटने जैसा महसूस होने लगता है. ज्यादा देर तक ऐसी जहरीली हवा में रहने से उनकी हालत और भी खराब हो सकती है. इस तरह की परेशानी से जूझ रहे लोगों को ऐसे मौसम में कम ही बाहर निकलना चाहिए.

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टिप्पणियांमास्क का करें इस्तेमाल

अगर हम कहें कि ऐसे मौसम में किसी को भी बाहर निकलने की जरूरत नहीं है तो ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं होगा. सभी लोगों को अपने काम पर जाने के लिए बाहर निकलना ही होता है. लेकिन इस जहरीले स्मॉग से बचने के लिए आप मास्क का प्रयोग कर सकते हैं. प्रदूषण को देखते हुए आज कई कंपनियां अच्छी क्वॉलिटी के मास्क तैयार कर रही हैं. बाहर निकलते ही चेहरे पर मास्क लगा दें. इसके अलावा आंखों की सुरक्षा के लिए भी आप चश्मे का प्रयोग कर सकते हैं.

स्मॉग से बचने के लिए कौन सा मास्क लगाएं?

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

हमारे शरीर में कुछ भी गलत होता है तो किसी न किसी तरीके से शरीर जवाब देने लगता है. लेकिन कई बार हम लोग इसे हल्के में लेकर बदलते मौसम का असर मान लेते हैं. लेकिन ऐसी भूल बिल्कुल भी न करें. अगर आपको अचानक सांस लेने में तकलीफ हो रही हो, या फिर आंखों में किसी तरह की जलन हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. इसे इग्नोर करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे मौसम में जितना हो सके डॉक्टर की सलाह लेते रहें.

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बच्चों और बुजुर्गों का रखें खास खयाल

इस तरह के मौसम का असर सबसे ज्यादा बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ता है. क्योंकि दोनों का ही इम्यून सिस्टम आम वयस्क के मुकाबले कमजोर रहता है. बच्चों को भी स्मॉग के बारे में बताएं, जिससे उन्हें भी खुद की सुरक्षा का खयाल रहे. इसके अलावा बच्चों को बाइक या साइकिल में ज्यादा नहीं बैठने दें. उन्हें हवा के संपर्क से जितना दूर रख सकें उतना ही अच्छा है. बुजुर्गों को भी ऐसे मौसम में बाहर कम ही निकलना चाहिए. इसके अलावा बुजुर्ग ऐसे मौसम के लिए एक मास्क जरूर ले लें.

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