म्यांमार सेना प्रमुख पर नरसंहार का मुकदमा चले: संयुक्त राष्ट्र

This handout picture taken and released by the Myanmar Armed Forces on March 27, 2017 shows Senior General Min Aung Hlaing, commander in chief of the Myanmar Armed Forces, speaking during a ceremony marking the country's 72nd Armed Forces Day in Naypyidaw. / AFP PHOTO / MYANMAR ARMED FORCES / Handout / RESTRICTED TO EDITORIAL USE - MANDATORY CREDIT "AFP PHOTO / MYANMAR ARMED FORCES" - NO MARKETING NO ADVERTISING CAMPAIGNS - DISTRIBUTED AS A SERVICE TO CLIENTS

हाइलाइट्स

तीन सदस्यीय दल ने अपनी रिपोर्ट में सैकड़ों रोहिंग्याओं की दास्तान, सैटलाइट फुटेज और अन्य सूचनाएं जुटाई हैं

यूएन की रिपोर्ट में म्यांमार सेना द्वारा रोहिग्याओं के घर जलाने, गैंगरेप आदि की पुष्टि की है

संयुक्त राष्ट्र की टीम ने रिपोर्ट के आधार पर म्यामांर सेना के 6 अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की भी सिफारिश की
यूएन की इस रिपोर्ट को बेहद तल्ख भाषा में पेश की गई रिपोर्ट माना जा रहा है

जिनीवा
संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि म्यांमार में रोहिंग्याओं के ऊपर सेना ने बर्बर अत्याचार किए। यूएन के शीर्ष मानवाधिकार निकाय के लिए काम करने वाले जांचकर्ताओं ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार को लेकर म्यांमार की सेना के शीर्ष अधिकारियों पर मुकदमा चलना चाहिए।

जांचकर्ताओं की पहली रिपोर्ट के साथ यह सिफारिश की गई है। इसे संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों की अब तक की सबसे सख्त भाषाओं में से एक माना जा रहा है । इन अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि म्यामांर में मानवाधिकार उल्लंघन किया गया। पिछले अगस्त में रोहिंग्याओं के विरुद्ध खून-खराबा शुरु हुआ था। संयुक्त राष्ट्र समर्थित मानवाधिकार परिषद के तहत काम करने वाले तीन सदस्यीय तथ्यों की पड़ताल करनेवाली दल ने अपनी रिपोर्ट में घर-बार छोड़ चुके सैकड़ों रोहिंग्याओं की दास्तान, सैटलाइट फुटेज और अन्य सूचनाएं जुटाई हैं।

शरणार्थी रोहिंग्याओं की दास्तान, सैटलाइट फुटेज के उपयोग के माध्यम टीम ने अपराधों का ब्योरा तैयार किया है जिसमें सामूहिक बलात्कार, गांवों को जलाया जाना, लोगों को दास बनाया जाना, बच्चों को उनके मां-बाप के सामने ही मार दिया जाना आदि शामिल हैं। टीम को म्यांमार में पहुंच नहीं दी गयी और उसने इसकी निंदा की।
इस रिपोर्ट की प्रति म्यांमार सरकार + को मिल गई है। टीम ने एक अनुमान का हवाला दिया जिसके हिसाब से हिंसा में 10,000 लोगों की जान चली गयी। जांचकर्ताओं ने मुकदमा के लिए म्यांमार की सेना के छह शीर्ष अधिकारियों के नाम लिए हैं। बता दें कि रोहिंग्या शरणार्थियों को अपना घर छोड़े अब एक साल हो चुका है। इससे पहले सोमवार को फेसबुक ने म्यांमार सेना प्रमुख को मानवाधिकार उल्लंघन का दोषी मानते हुए फेसबुक से बैन कर दिया है।

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