राम मंदिर पर केशव के बयान पर पक्षकारों का जवाब, ‘चुनाव सिर आया है तो लॉलीपॉप बांट रहे हैं’

उत्तर प्रदेश के डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में बिल लाने की बात पर विवाद से जुड़े पक्षकारों ने इसे चुनावी लॉलीपॉप बताया है। हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों ने कहा, ‘मामला कोर्ट में है, अब इस तरीके का बयान कोर्ट की अवमानना है। कानून बना कर बीजेपी को मंदिर निर्माण कराना होता तो बहुमत मिलते ही करा देती। चुनाव नजदीक है राम अब नहीं याद आएंगे तो कब याद आएंगे।’

मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, ‘चुनाव सिर पर आ गया है। जनता को राम मंदिर न बना पाने की सफाई देनी है इसीलिए उसकी भूमिका तैयार की जा रही है। मामला अदालत में है, इस तरह का बयान देना अदालत का अपमान है। अदालत बड़ी होती है न कि नेता।’ हाजी महबूब ने कहा, ‘चुनावी बिगुल बीजेपी ने फूंक दिया है लेकिन ये जो भी कर लें, अगला इलेक्शन इनके हाथ में नहीं है। जब अदालत में हियरिंग हो रही है तो इस तरह के बयान का क्या मतलब? ये केवल जनता को भ्रमित कर रहे हैं।’

‘मंदिर अब नहीं बना तो कब बनेगा?’
निर्मोही अखाड़े के पक्षकार महंत दिनेन्द्र दास ने कहा, ‘मालिकाना हक निर्मोही अखाड़ा के पास है और मामला कोर्ट में है। इस तरह का बयान कोर्ट की अवेहलना है। मंदिर तो बना है केवल भव्य निर्माण बाकी है।’ राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नित्यगोपाल दास ने कहा, ‘मंदिर निर्माण अभी नहीं तो कभी नहीं। केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी के रहते हिंदू समाज, संत-धर्माचार्य आशान्वित हैं। अब जब लोकसभा में पूर्ण बहुमत है तो देरी क्यों? इसके बावजूद मंदिर निर्माण में देरी होती है तो इसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ेगा। जनता ने बहुमत दे दिया है अब राम मंदिर बनाने की बारी बीजेपी की है।’

वीएचपी के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शारद शर्मा ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट में मामला कछुवे की रफ्तार से चल रहा है और हिंदू समाज का धैर्य टूट रहा है। न्याय की चौखट पर भू स्वामी याची बना खड़ा है, ऐसे में संसद ही एक मार्ग है, इसका चिंतन स्वयं केंद्र की सरकार करे। पार्षद से लेकर महामहिम तक मंदिर आंदोलन को बखूबी जानते हैं। ऐसे में सरकार को ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है, देश की जनता अब प्रतीक्षा के मूड में नहीं है।’

क्या कहा था डेप्युटी सीएम ने
केशव प्रसाद मौर्या ने कहा था, ‘अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अगर कोई विकल्प नहीं बचता है तो ऐसी स्थिति में बीजेपी सरकार संसद में बिल ला सकती है लेकिन इसके लिए संसद के उच्च सदन (राज्य सभा) में बीजेपी को बहुमत की आवश्यकता है। दोनों सदनों में बहुमत होगा तो केंद्र सरकार कानून बनाकर मंदिर का निर्माण करा सकती है।’

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