राफेल डील पर विपक्ष का हंगामा, राज्यसभा 2.30 बजे तक स्थगित

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राज्यसभा में शुक्रवार को तीन तलाक बिल पेश किया जाएगा. 29 दिसंबर को लोकसभा में यह विधेयक पारित हो गया था, जिसमें तुरंत तीन तलाक देने को अपराध की श्रेणी में रखा गया था. तीन तलाक के कई प्रावधानों पर विपक्षी पार्टियों को एतराज है जिस वजह से विधेयक संसद में विवाद का केंद्र बना हुआ है. शुक्रवार को भी इस पर बहस के दौरान हंगामा बरपने की पूरी गुंजाइश है. इससे पहले गुरुवार को सरकार ने तीन तलाक से जुड़े कानून में आरोपी को सुनवाई से पहले जमानत जैसे कुछ प्रावधानों को मंजूरी दे दी. सरकार ने इस कदम से इन चिंताओं को दूर करने की कोशिश है कि तीन तलाक की परंपरा को अवैध घोषित करने और पति को तीन साल तक की सजा देने वाले कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है.

संसद के मॉनसून सत्र का शुक्रवार को अंतिम दिन है और सरकार राज्यसभा में संशोधन पेश कर सकती है. अगर विधेयक ऊपरी सदन में पारित हो जाता है तो इसे संशोधन पर मंजूरी के लिए वापस लोकसभा में पेश करना होगा. कानून ‘गैरजमानती’ बना रहेगा लेकिन आरोपी जमानत मांगने के लिए सुनवाई से पहले भी मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकते हैं. गैरजमानती कानून के तहत, जमानत थाने में ही नहीं दी जा सकती. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि मजिस्ट्रेट ‘पत्नी को सुनने के बाद’ जमानत दे सकें. उन्होंने साफ किया, ;’लेकिन प्रस्तावित कानून में तीन तलाक का अपराध गैरजमानती बना रहेगा.’

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