Home बड़ी ख़बर CBI की महाभारत का ‘शकुनि’, इतना दबदबा मगर इंटरनेट से गायब क्यूँ?   

CBI की महाभारत का ‘शकुनि’, इतना दबदबा मगर इंटरनेट से गायब क्यूँ?   

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सीबीआई के सीबीआई पर छापेमारी की भारी भरकम और उलझी गुत्थी से इतर एक और दिलचस्प खबर है जिससे सब बेखबर हैं. वो कौन है जिसका नाम बार-बार आ रहा है, पहचान भी साफ़ है वो कोई आम आदमी नहीं बल्कि 14 कंपनियों का डायरेक्टर है. जिसने 2014 में हैदराबाद में प्लेबॉय क्लब शुरू किया मगर वो राईट विंग को रास नहीं आया और काफी सुर्ख़ियों के बाद अपने इतिश्री को नसीब हुआ. ये सब बताने का मकसद सिर्फ इतना सा है कि वो व्यक्ति सतीश बाबू सना इंटरनेट पर से गायब हैं या फिर शायद उनकी तस्वीरों का किसी आदेश के बाद इन्टरनेट पर से किडनैप कर लिया गया है लेकिन हमें हमारे किसी अज्ञात रीडर ने व्हाट्सएप पर एक तस्वीर भेजी है और ये दावा किया है कि ये तस्वीर उन्हीं सतीश बाबू सना की है जिनसे सीबीआई के दफ्तर में 13 बार बुलाकर एक ही सवाल पूछा गया था कि मोईन कुरैशी से तुम्हारा क्या संबंध है. सतीश बाबू सना ने ही सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के ऊपर 3 करोड़ रूपये बतौर रिश्वत लेने का आरोप लगाया और इस पूरे सीबीआई के महाभारत की पटकथा की शुरवात होती है.

Swentoday.com इस तस्वीर की कोई पुष्टि नहीं करती है और लगातार हमारी टीम इस तस्वीर की सत्यता की जांच कर रही है. अगर किसी रीडर के पास तस्वीर से जुडी कोई जानकारी है तो हमारे ऑफिसियल व्हाट्सएप नंबर पर भेज सकता है.

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कौन हैं फिर ये सतीश बाबू?

सतीश बाबू सना कौन है इसका जवाब आपको देने से पहले आपको ये जान लेना बहुत ज़रूरी हैं कि जैसे ही सीबीआई के अन्दर घमासान शुरू हुआ वैसे ही सतीश बाबू सना की तस्वीरें इन्टरनेट पर से अचानक गायब हो गईं और गाहे-बगाहे ऐसा कहा जा रहा है कि ये सब किसी विशिष्ट कारण से आदेश पर हुआ. किसी के पास तस्वीर नहीं है और जिनके पास है वो इसे चाहते हुए भी किसी को दिखा नहीं सकते. अब आप ये जान लीजिये कि सतीश बाबू सना आंध्र प्रदेश के बड़े बिजनेसमैन हैं. साथ ही सतीश बाबू के बड़े पॉलिटिकल संबंध भी है. सतीश बाबू सना के कांग्रेस, YSR कांग्रेस और तेलगु देशम पार्टी के बड़े नेताओं से काफी करीबी संबंध हैं.

Rakesh Asthana

सतीश बाबू ने अपनी पेशी और बयानों में सीबीआई के नंबर 2 के अधिकारी राकेश अस्थाना का नाम लिया. राकेश अस्थाना गुजरात कैडर के 1971 बैच के अधिकारी हैं. सतीश बाबू आंध्र के काकिंदा में बिजली विभाग में नौकरी करते थे जिसे छोड़ वो हैदराबाद शिफ्ट हुए और यहाँ आकर उन्होंने क्रिकेट में हाथ आजमाया और कई कम्पनीज़ के साथ मिलकर बिज़नेस शुरू किया. साथ ही कांग्रेस, तेलगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ मिलकर कई बड़े-बड़े कामों को अंजाम दिया. सतीश बाबू का नाम पहली बार तब चर्चा में आया जब ईडी ने मोईन कुरैशी मामले (2015) की चार्जशीट में सतीश बाबू के नाम का ज़िक्र किया.

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सतीश बाबू फिलहाल कई बड़ी कंपनी Rasama Estates LLP, Goldcoast Properties Private Limited, Matrix Natural Resources Private Limited, East Godavari Breweries Private Limited  में डायरेक्टर की भूमिका में काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं अपना राजनीतिक दबदबा कायम रखने के लिए गोदावरी जिले के कांग्रेस और तेलगु देशम पार्टी के लीडर्स के साथ बड़े करीबी संबंध भी हैं. सतीश बाबू सना के निवास पर जब पत्रकारों ने जाकर मिलना चाहा तो उनके घर के बाहर मौजूद गार्ड्स ने बताया कि सतीश बाबू और उनका परिवार 2 दिन पहले ही यहाँ से जा चुके हैं.

सतीश बाबू की बात एक बार में क्यूँ नहीं समझ पाए देवेंद्र कुमार

सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने शिकायतकर्ता सतीश बाबू को 13 बार सीबीआई मुख्यालय बुलाया था. हर बार एक ही सवाल पूछा जाता कि बताओ मोईन अख़्तर क़ुरैशी के साथ तुम्हारा क्या संबंध है. सतीश ने उसे कई बार जवाब दिया कि वह एक निवेशक बैंकर है. उसने मोईन की कंपनी में पचास लाख रुपये निवेश किए हैं. पहली पेशी से लेकर आखिरी पेशी तक उसने यही जवाब मौखिक तौर पर और लिखित रुप से दिया, लेकिन केस का जांच अधिकारी देवेंद्र कुमार कुछ मानने को तैयार नहीं था. शिकायतकर्ता के मुताबिक, देवेंद्र कुमार ने सबसे पहले 9 अक्टूबर 2017 को सतीश बाबू के पास नोटिस भेजा था. उसमें लिखा था कि बाबू को तीन दिन बाद यानी 12 अक्टूबर को सीबीआई मुख्यालय में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना है. सवाल वही था कि आपका मोईन से क्या संबंध है. दिनभर यही सवाल चलता रहा. शाम को सतीश अपने घर के लिए रवाना हो गया. इसके बाद 17 अक्टूबर को दूसरा नोटिस आ गया और इसी तरह ये पूरा वाकया चलता रहा.

सीबीआई के नंबर 1 और सीबीआई के नंबर 2 के घमासान ने देश को हिलाकर रख दिया है. सीबीआई के टॉप बॉसस पर जो आरोप लगे हैं शायद उसके बाद अब देश की जनता ये सवाल करे कि क्या सीबीआई में भी रिश्वतखोरी है और अगर है तो फिर निष्पक्ष जांच का ठेंका इस देश में किसके पास है. खैर ये सवाल सबके ज़हन में है और सरकार को भी इसकी बड़ी चिंता है शायद तभी दोनों राकेश अस्थाना और अलोक वर्मा को छुट्टी पर भेज सीबीआई के नंबर 3 की हैसियत वाले ओड़िसा कैडर के एम. नागेश्वर को अंतरिम डायरेक्टर बना दिया गया है.

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