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पीड़िता ने बयां किया दर्द कहा-जानवरों की तरह नोंचते थे

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दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में युवती ने दाती महाराज के खिलाफ शिकायत दी है. युवती ने पुलिस को बताया कि वह करीब पिछले दस सालों से महाराज की अनुयायी थी. लेकिन महाराज और चेलों द्वारा बार-बार बलात्कार किए जाने के बाद वह अपने घर राजस्थान लौट गई. जिसके बाद दाती महाराज के खिलाफ एफआई दर्ज कर ली गई. पीड़िता ने अपनी बात सबके सामने रखने के लिए एक पत्र लिखा है.

पीड़िता ने पत्र में लिखा, ‘आज आपसे उस संदर्भ में शिकायत करने जा रही हूं जिसे परिवार को खो देने के डर के कारण कभी कहने की हिम्मत ना कर सकी. लेकिन अब घुट-घुट कर नहीं जिया जाता. भले ही मेरी जान क्यों न चली जाए. जिसकी मुझे पूरी आशंका है. पर फिर भी मरने से पहले यह सच सबके सामने लाना चाहती हूं.’

बड़ी हिम्मत से पत्र लिख रही हूं, लिखते वक्त हाथ कांप रहे हैं

आगे पत्र में लिखा है, ‘बड़ी हिम्मत से पत्र लिख रही हूंं, लिखते वक्त हाथ कांप रहे हैं, मानो जैसे फिर से मेरे साथ वही सबकुछ दोबारा हो रहा हो. जिसके बारे में सोच कर भी डर लगता है. मुझे और मेरे परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि में इस ढोंगी बाबा की सच्चाई सामने ला सकूं. अगर मुझे सुरक्षा नहीं दी गई तो यह तय है कि न मैं रहूंगी न मेरा परिवार. सब कुछ खत्म हो जाएगा. दाती मदनलाल बहुत ही खतरनाक है. अब तक मैं चुप इसलिए रही कि मुझे नहीं लगता था की मेरे माता-पिता मेरा साथ देंगे. लेकिन जब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो ये घटना अपने मम्मी-पापा को बताई तब उन्होंने वचन दिया कि आखिरी सांस तक तुम्हारा साथ देंगे.’

पीड़िता ने लिखा, ‘दाती मदनलाल राजस्थानी ने अपनी सहयोगी श्रद्धा उर्फ नीतू, अशोक,अर्जून, और नीमा जोशी के साथ मिलकर 9 जनवरी 2016 को दिल्ली स्थित आश्रम श्री शनि तीर्थ असोला फतेहपुर बेरी महरौली में मेरे साथ रेप किया.’

‘चरण सेवा के नाम पर मेरे साथ रेप किया’
पीड़िता ने लिखा, ‘यह तब हुआ जब मुझे चरण सेवा के लिए श्रद्धा, दाती मदनलाल राजस्थानी के पास लेकर गई. वहां मेरे साथ रेप किया. मेरे शरीर को हर तरह से नोचा गया. मुझे जबरन अपनी पेशाब पिलाते थे. अशोक अर्जुन और अनिल भी मेरे साथ ऐसा ही करते थे. इसके बाद यही चीजें मेरे साथ 26, 27 और 28 मार्च 2016 को राजस्थान में स्थित पाली के आश्रम में दाती मदनलाल ने दोहराई. जिसमे अनिल और श्रद्धा ने दाती मदनलाल का भरपूर साथ दिया. अनिल ने भी मेरे साथ ऐसा ही किया.’

‘शरीर के हर हिस्से को जानवरों की तरह नोचा गया’
पीड़िता ने बताया कि चरण सेवा के नाम पर इन दोनों घटनाओं में शरीर के हर हिस्से को जानवरों की तरह नोचा गया और श्रद्धा हमेशा मुझे कहती रही कि इससे मोक्ष प्राप्त होगा, ये भी सेवा ही है. वो मुझे दाती मदनलाल राजस्थानी के साथ ये सब करने के लिए मजबूर करती थी.

सब करने के बाद दाती मदनलाल ने मुझसे कहा, तुम्हारी सेवा पूरी हुई.

श्रद्धा कहती थी, ‘तुम बाबा की हो और बाबा तुम्हारे. तुम कोई नया काम नहीं कर रही हो सब करते आए हैं. कल हमारी बारी थी आज तुम्हारी बारी है. कल न जाने किसकी होगी. बाबा समुंदर हैं, हम सब उसकी मछलियां है इसे कर्ज समझ कर चुका लो’

‘घुट-घुट कर जीने से अच्छा एक बार लड़कर मरूं’

पत्र में लिखा है, ये तीन रातें मेरी जिंदगी की सबसे भयानक रातें थी. घुट-घुट कर जीने से अच्छा एक बार लड़कर मरूं, ताकी इस भयानक गंदे राक्षस की सच्चाई सबके सामने ला सकूं. अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो न जाने कितनी लड़कियां मेरी तरह बेबस लाचार बनकर रह जाएंगी. सेवा के नाम पर ऐसा किया गया. दाती मदनलाल राजस्थानी तंत्र-मंत्र की विधाओं में निपुण हैं और हमेशा अपना काम ऐसे ही करते हैं.

पीड़िता ने आगे लिखा, इस घटना के बाद मेरी सोचने की इच्छा शक्ति मानो खत्म हो गई है. ‘मुझे लड़की होना पाप लगने लगा था. क्या दाती मदनलाल ने मुझे इसी दिन के लिए पढ़ाया था और साध्वी बनाया था कि एक दिन वो अशोक, अर्जुन, अनिल और श्रद्धा के साथ मिलकर मेरे साथ ये सब कर सके.’ श्रद्धा के लिए पीड़िता ने लिखा, ‘साध्वी बना सफेद पोशाक में कोई ऐसा भयानक काम भी कर सकता है, सपने में भी नहीं सोचा था.’

पीड़िता ने लिखा दाती महाराज को हो फांसी की सजा

‘मुझे नहीं पता इस शिकायत के बाद मेरा क्या होगा. शायद मैं आप लोगों के बीच न रहूं, लेकिन मेरी शिकायत आप सभी के बीच रहेगी. सिर्फ इस उम्मीद के सहारे शिकायत पत्र लिख रही हुं, शायद मुझे न्याय मिले और जिंदगियां बर्बाद होने से बच सकें.’

पीड़िता ने लिखा, ‘बाबा बन लड़कियों को पढ़ा-लिखा कर अपनी हवस का शिकार बनाने वाले दाती मदनलाल को जीने का कोई अधिकार नहीं है. मेरी एक ही इच्छा है इसके कर्मो की सजा फांसी ही होनी चाहिए. आपसे यह प्रार्थना है कि मेरा नाम, मेरी पहचान मेरा पता, सबकुछ गुप्त रखा जाए वरना उसकी दी हुई धमकियां सच हो जाएंगी, जिसमें कहा गया था कि न तू रहेगी न अस्तित्व रहेगा, जिसके डर से मैं आजतक चुप रही.’ ‘न्याय की इच्छा मरने से पहले और मरने के बाद, जो मेरे साथ हुआ वो किसी के साथ न हो’

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