Home दुनिया सीरिया पर अमेरिकी हमला, दागीं 100 से ज्यादा मिसाइलें

सीरिया पर अमेरिकी हमला, दागीं 100 से ज्यादा मिसाइलें

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अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने शनिवार को सीरिया पर अपनी सबसे ताकतवर मिसाइलों से 100 से ज्यादा हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ‘मिशन पूरा’ होने की घोषणा की। दावा किया गया कि सीरिया में केमिकल हथियारों को तबाह कर दिया गया है। इस हमले को लेकर तमाम देश बंट गए हैं। सीरिया ने हवाई हमले को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उकसाने वाली कार्रवाई करार दिया। रूस और ईरान ने चेतावनी दी कि इस हमले के गंभीर नतीजे सामने आएंगे। चीन ने कहा कि इससे आगे चलकर संघर्ष का हल निकालना और मुश्किल हो जाएगा।

केमिकल हथियारों के ठिकाने

शनिवार तड़के हुए हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिस कामयाबी का दावा अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन कर रहे हैं, वह वाकई में हासिल हुई है? रॉयटर्स ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि सीरियाई सरकार ने सैन्य ठिकानों को हमले से पहले ही खाली करा लिया था। वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी कहा है कि सीरियाई सेना ने दशकों पुरानी मशीनों की मदद से अमेरिकी के नेतृत्व वाले मिसाइल हमले को नाकाम किया है।

लोगों में गुस्सा

हमले के बाद से राजधानी दमिश्क में आम लोग सड़कों पर हाथों में सीरियाई झंडा लिए और बंदूकें लिए प्रदर्शन करते नजर आए। हर उम्र के इन लोगों के हाथों में बशर अल असद की तस्वीरें भी थीं।

तड़के धमाकों से गूंजा शहर

शनिवार तड़के 4 बजे लगातार कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद विमानों के गरजने की आवाज आई और राजधानी के पूर्वी और उत्तरी छोरों से आसमान में घना धुआं उठता देखा गया।

क्या था निशाने पर

राजधानी दमिश्क चारों तरफ से पहाड़ियों और सैन्य ठिकानों से घिरा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के मुताबिक, हवाई हमले सीरिया के रासायनिक हथियारों के तीन भंडारगृहों को निशाना बनाकर किए गए। इसमें दमिश्क के पास वैज्ञानिक शोध अनुसंधान इकाई शामिल है, जहां रासायनिक हथियारों का कथित तौर पर उत्पादन होता है। होम्स के पास रासायनिक हथियार भंडारण इकाई और होम्स शहर के अहम सैन्य ठिकाने, जहां रासायनिक हथियारों से जुड़ी सामग्री रखी जाती है।

सीरिया पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा

हमले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सीरिया की असद सरकार पर लगे केमिकल अटैक के आरोपों की रासायनिक हथियारों की रोकथाम से जुड़ी संस्था OPCW से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, सभी पक्षों को संयम दिखाते हुए यूएन चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत बातचीत से मसले को हल करना चाहिए।

 

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